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चिली: मापुचे आंदोलन पर सरकारी कार्रवाई तेज़, नई पीढ़ी ने बदली संघर्ष की रणनीति

Summary
चिली में सरकार की सख़्त कार्रवाई और नेताओं को लंबी सज़ाओं के बीच, मापुचे आंदोलन एक नए दौर से गुज़र रहा है। जहाँ पुरानी पीढ़ी ज़मीन पर कब्ज़े को लेकर दृढ़ है, वहीं युवा अब कानूनी और पर्यावरणीय तरीकों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
चिली में अपने पैतृक भूमि अधिकारों के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे मापुचे आंदोलनकारी समूह अब तक के सबसे कठिन दौर का सामना कर रहे हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति होज़े एंटोनियो कास्ट की नई धुर-दक्षिणपंथी सरकार की सख़्त कार्रवाई और नेताओं को दी जा रही लंबी जेल की सज़ाओं के कारण आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है।
सरकार की सख़्ती और ऐतिहासिक संघर्ष
चिली के सबसे बड़े स्वदेशी समूह मापुचे, देश की आबादी का लगभग 9% (लगभग 16 लाख लोग) हैं। उनका संघर्ष 19वीं सदी के अंत में शुरू हुआ जब चिली सरकार ने उनके क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया। यह स्थिति 1973-90 के ऑगस्टो पिनोशे तानाशाही के दौरान और खराब हो गई, जब बड़े पैमाने पर ज़मीन वानिकी कंपनियों को हस्तांतरित कर दी गई।
इसके जवाब में, कोऑर्डिनाडोरा अराउको-मालेको (CAM) जैसे लड़ाकू समूहों ने ज़मीन पर कब्ज़ा करने और वानिकी कंपनियों की संपत्ति को निशाना बनाने जैसे तरीके अपनाए। हालाँकि, 2022 से देश के दक्षिणी हिस्सों में आपातकाल लागू है और नई सरकार ने इस संघर्ष के प्रति और भी कड़ा रुख अपनाया है। CAM के संस्थापक हेक्टर लैतुल को हाल ही में हिंसा भड़काने और अन्य अपराधों के लिए 23 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है, जिसे अधिकारी हिंसा कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानते हैं।
प्रतिरोध के बदलते तरीक़े
सरकारी दबाव के बीच, मापुचे आंदोलन में एक पीढ़ीगत बदलाव देखा जा रहा है। जहाँ कुछ समुदाय ज़मीन पर कब्ज़े के ज़रिए पारंपरिक प्रतिरोध जारी रखने की कसम खाते हैं, वहीं युवा पीढ़ी संघर्ष के लिए नए रास्ते अपना रही है।
Ad- कानूनी लड़ाई: युवा मापुचे अब अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी तरीकों का सहारा ले रहे हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण हेक्टर लैतुल के सबसे छोटे बेटे, 20 वर्षीय वेफ़तुई हैं, जो चिली के एक शीर्ष विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं ताकि वे मापुचे कैदियों और पैतृक भूमि की कानूनी रूप से रक्षा कर सकें।
- पर्यावरणीय अभियान: कुछ युवा कार्यकर्ता वानिकी भूमि को पुनः प्राप्त करने के बजाय नदियों, जंगलों और औषधीय पौधों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 20 वर्षीय आध्यात्मिक उपचारक (माची) मिलारे सुआरेज़, चीन की थ्री गोरजेस कंपनी द्वारा बनाए जा रहे एक जलविद्युत बांध का विरोध कर रही हैं, क्योंकि इससे दुर्लभ औषधीय पौधों वाले क्षेत्र के डूबने का खतरा है।
ज़मीनी हक़ीक़त और भविष्य की दिशा
सरकारी कार्रवाई के बावजूद, ज़मीन पर प्रतिरोध की भावना जीवित है। फुंडो पिडेंको जैसे कब्ज़े वाले क्षेत्रों में, समुदाय के लोग अपनी ज़मीन पर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, टेमुकुईकुई जैसे इलाकों में सैन्यीकरण बढ़ने से स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है।
यह स्पष्ट है कि मापुचे संघर्ष एक दोराहे पर है। एक ओर अनुभवी कार्यकर्ता अदालतों और जेलों का सामना कर रहे हैं, तो दूसरी ओर युवा पीढ़ी कानूनी शिक्षा और पर्यावरण सक्रियता जैसे नए उपकरणों के साथ लड़ाई को आगे बढ़ा रही है। यह बदलाव मापुचे आंदोलन के भविष्य की एक जटिल और विकसित होती तस्वीर पेश करता है।