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डॉलर की मजबूती से एशियाई मुद्राएं कमजोर, येन सात महीने के उच्च स्तर के पास

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई मुद्राओं में गिरावट देखी गई, क्योंकि व्यापारियों ने इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं पर दांव बढ़ाया। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BOJ) द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त किए जाने की उम्मीदों के बीच जापानी येन सात महीने के उच्चतम स्तर के करीब बना रहा।
डॉलर में मजबूती और फेड पर नजरें
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.2% की बढ़त के साथ लगभग 99.35 पर कारोबार कर रहा था, जो दो सप्ताह की मामूली गिरावट के बाद आया है। यह मजबूती अगस्त में अमेरिकी उपभोक्ता कीमतों में तेजी के बाद आई है, जिससे फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।
CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब 16 सितंबर की बैठक में फेड द्वारा दर वृद्धि की 86% संभावना देख रहा है। इस बढ़ती उम्मीद ने डॉलर को समर्थन दिया है और ट्रेजरी यील्ड को भी बढ़ाया है। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग 4.97% पर थी।
येन को BOJ की नीति से सहारा
डॉलर के मुकाबले येन 154.03 पर था, जो पिछले सप्ताह के 152.89 के स्तर के करीब है, यह फरवरी के बाद का सबसे मजबूत स्तर था। इस महीने येन में लगभग 4% की तेजी आई है। इसका मुख्य कारण यह उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है।
Adबाजार इस सप्ताह शुक्रवार को होने वाली BOJ की बैठक में 25-आधार-अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है। निवेशकों की नजर अब बढ़ोतरी के साथ-साथ भविष्य में नीतिगत सख्ती की गति पर बैंक के मार्गदर्शन पर होगी, जो येन की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अन्य एशियाई मुद्राओं का हाल
इस सप्ताह तीन प्रमुख केंद्रीय बैंकों - फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान - के नीतिगत फैसले आने हैं, जिससे मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD): अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.4% कमजोर होकर 1.3991 पर आ गया।
- न्यूजीलैंड डॉलर (NZD): 0.5% गिरकर $0.5782 पर कारोबार कर रहा था।
- दक्षिण कोरियाई वॉन (KRW): 0.25% की गिरावट के साथ 1,344.86 पर था।
- चीनी युआन (CNY): काफी हद तक स्थिर रहा।
एक सार्वजनिक अवकाश के कारण भारतीय बाजार सोमवार को बंद थे। मध्य पूर्व में नए हमलों के बाद आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 3% बढ़कर $107.60 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई का दृष्टिकोण और जटिल हो गया है।