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हेयर रिलैक्सर से कैंसर के जोखिम को छिपाने का आरोप, L'Oreal पर एरिज़ोना ने किया मुकदमा

कॉस्मेटिक्स की दिग्गज कंपनी L'Oreal SA पर कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि अमेरिकी राज्य एरिज़ोना ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि L'Oreal ने जानबूझकर अपने हेयर रिलैक्सर उत्पादों से जुड़े कैंसर के जोखिमों को उपभोक्ताओं से छिपाया।
राज्य सरकार की कानूनी कार्रवाई
एरिज़ोना के अटॉर्नी जनरल क्रिस्टिन मेयेस ने राज्य की अदालत में यह मुकदमा दायर किया है, जिससे एरिज़ोना हेयर रिलैक्सर से जुड़े कैंसर के कथित जोखिमों पर मुकदमा करने वाला पहला राज्य बन गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में L'Oreal पर राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।
राज्य ने कंपनी पर जुर्माना और हर्जाना लगाने की मांग की है। इसके अलावा, एक अदालती आदेश की भी मांग की गई है जो L'Oreal को इन उत्पादों को तब तक बेचने से रोके जब तक कि वह कैंसर के जोखिम की चेतावनी शामिल न करे। मुकदमे में कहा गया है कि कंपनी ने दशकों तक महिलाओं और बच्चों को इन उत्पादों का विपणन करते समय मुनाफे को उपभोक्ता सुरक्षा पर प्राथमिकता दी।
L'Oreal पर बढ़ता दबाव
यह मुकदमा L'Oreal के लिए एक नई चुनौती है, जो पहले से ही उपयोगकर्ताओं और उनके परिवारों द्वारा दायर किए गए 12,000 से अधिक समान मुकदमों का सामना कर रही है। इन सभी मामलों को शिकागो की एक संघीय अदालत में मल्टीडिस्ट्रिक्ट लिटिगेशन (MDL) प्रक्रिया के तहत एक साथ जोड़ दिया गया है ताकि सुनवाई अधिक कुशलता से हो सके।
AdL'Oreal ने इन आरोपों का खंडन किया है। कंपनी का कहना है कि उसके उत्पादों की कठोर सुरक्षा समीक्षा की जाती है और उसे विश्वास है कि इन दावों का कोई कानूनी या वैज्ञानिक आधार नहीं है। हालांकि, इस मामले में रेवलॉन (Revlon) जैसी अन्य कंपनियों का भी नाम लिया गया है, जिन्होंने भी आरोपों से इनकार किया है।
वैज्ञानिक अध्ययन और निवेशकों के लिए मायने
इन मुकदमों की शुरुआत 2022 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा किए गए एक अध्ययन के बाद हुई थी। अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं साल में कई बार इन उत्पादों का इस्तेमाल करती थीं, उनमें गर्भाशय कैंसर होने की संभावना दोगुने से अधिक थी।
निवेशकों के लिए, यह राज्य-स्तरीय मुकदमा कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और वित्तीय जोखिम को दर्शाता है। यदि कंपनी के खिलाफ फैसला आता है, तो उसे भारी जुर्माना और हर्जाना देना पड़ सकता है, जिसका असर उसकी बिक्री और स्टॉक की कीमत पर पड़ सकता है। इस मामले में आगे की अदालती कार्यवाही पर बाजार की नजर बनी रहेगी, जिसके ट्रायल अगले साल शुरू हो सकते हैं।