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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% के करीब, बाजार के प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ेगा असर

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग दो दशकों में पहली बार 5% के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ोतरी ने विश्लेषकों के बीच एक बहस छेड़ दी है कि क्या यह एक मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है या उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए उधार की बढ़ती लागत के कारण बाजार में आने वाली गिरावट का।
कॉर्पोरेट लागत और स्टॉक मूल्यांकन पर प्रभाव
ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि सीधे तौर पर कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत को बढ़ाती है। इससे कंपनियों के लिए कर्ज को रीफाइनेंस करना, अधिग्रहण करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय करना अधिक महंगा हो जाता है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है।
वहीं, ऊंची यील्ड बॉन्ड्स को स्टॉक की तुलना में अधिक आकर्षक बनाती है। सोसाइटी जेनरल (Societe Generale) के अल्बर्ट एडवर्ड्स ने बताया कि 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड और स्टॉक पर डिविडेंड यील्ड का अनुपात 2000 के डॉट-कॉम बुलबुले के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है। उनके अनुसार, यह स्थिति स्टॉक बाजार को किसी भी नकारात्मक खबर के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
आर्थिक विकास बनाम बढ़ता कर्ज
विश्लेषकों के लिए एक महत्वपूर्ण मीट्रिक 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड और नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर के बीच का संबंध है। हाल ही में, बेंचमार्क यील्ड 4.8% तक पहुंच गई, जबकि दूसरी तिमाही में साल-दर-साल नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 6.56% थी।
Adजब तक आर्थिक विकास दर उधार लेने की लागत से अधिक रहती है, तब तक सरकार अपने बढ़ते कर्ज (जो हाल ही में $40 ट्रिलियन को पार कर गया है) को प्रबंधित कर सकती है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यील्ड बढ़ने से यह संतुलन बिगड़ने का खतरा है।
टीडी सिक्योरिटीज (TD Securities) के अनुसार, यील्ड में हालिया वृद्धि मुख्य रूप से बढ़ती "रियल रेट्स" (मुद्रास्फीति-समायोजित दरें) के कारण हुई है, न कि केवल मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण। यह मजबूत आर्थिक विकास का एक संकेतक माना जाता है।
विलय और अधिग्रहण (M&A) सौदों पर संकट
बढ़ती बॉरोइंग कॉस्ट का सीधा असर विलय और अधिग्रहण (M&A) बाजार पर पड़ रहा है, जिससे सौदे करना महंगा हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों और बैंकरों के बीच डर का माहौल बन रहा है और कई लोग M&A गतिविधियों में संभावित मंदी की आशंका जता रहे हैं।
विश्लेषकों ने यह भी नोट किया है कि खरीदार अब सौदों के लिए कम कीमत चुकाने को तैयार हैं, जो वॉल स्ट्रीट के लिए चिंता का विषय है। इससे आने वाले महीनों में डील-मेकिंग की गति धीमी पड़ सकती है।