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ट्रंप की ईरान पर टिप्पणी से वॉल स्ट्रीट में तेज़ी, अमेरिकी वायदा बाज़ार स्थिर

Summary
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ बातचीत की संभावना जताने वाली टिप्पणी के बाद वॉल स्ट्रीट में तेज़ी आई, जिससे निवेशक धारणा में सुधार हुआ। हालांकि, गुरुवार शाम को अमेरिकी स्टॉक वायदा बाज़ार में मामूली बदलाव देखा गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ बातचीत की संभावना जताने वाली टिप्पणी के बाद वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों में गुरुवार को बढ़त दर्ज की गई। इस सकारात्मक माहौल के बाद, अमेरिकी स्टॉक वायदा बाज़ार शाम के कारोबार में स्थिर बना रहा, जिससे भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिले।
बाज़ार का प्रदर्शन
गुरुवार को वॉल स्ट्रीट के तीनों मुख्य सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे पिछले सत्र के नुकसान की भरपाई हो गई।
- डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) में 0.3% की बढ़त हुई।
- S&P 500 0.8% चढ़ा।
- नैस्डैक कंपोजिट (NASDAQ Composite) में 1.3% की तेज़ी आई।
टेक्नोलॉजी शेयरों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिपमेकर कंपनियों, ने इस तेज़ी का नेतृत्व किया। फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में लगातार दूसरे सत्र में लगभग 3% की बढ़त देखी गई। हालांकि, Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार शाम को वायदा कारोबार में थोड़ी नरमी दिखी। S&P 500 फ्यूचर्स 0.1% और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.3% नीचे थे, जबकि डॉव जोन्स फ्यूचर्स लगभग सपाट कारोबार कर रहा था।
तेज़ी के पीछे के कारण
Adबाज़ार की धारणा में सुधार का मुख्य कारण राष्ट्रपति ट्रंप का वह बयान था जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान ने बातचीत के लिए संपर्क किया है। इस टिप्पणी से यह उम्मीद जगी है कि हालिया सैन्य तनाव के बावजूद वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम हो सकता है।
इस खबर के बाद तेल की कीमतों में नरमी आई, जो इस सप्ताह की शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बढ़ गई थीं। तेल की कीमतों में गिरावट से यह चिंता कम हुई है कि ऊर्जा की बढ़ती लागत मुद्रास्फीति के दबाव को फिर से बढ़ा सकती है और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दृष्टिकोण को जटिल बना सकती है।
आर्थिक आंकड़े और भविष्य का दृष्टिकोण
निवेशकों ने नवीनतम आर्थिक आंकड़ों पर भी ध्यान दिया। प्रारंभिक बेरोज़गारी दावे घटकर 215,000 रह गए, जो यह दर्शाता है कि श्रम बाज़ार अभी भी अपेक्षाकृत मज़बूत है।
वहीं, फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स से पता चलता है कि अधिकारी लगातार मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर चिंतित हैं, जिससे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। अब बाज़ार का ध्यान दूसरी तिमाही के नतीजों के सीज़न पर है, जिसकी शुरुआत अगले सप्ताह प्रमुख बैंकों की रिपोर्ट के साथ होगी।