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अमेरिकी वायदा बाजार स्थिर, AI विकास की धीमी गति और फेड की बैठक पर निवेशकों की नजर

Summary
प्रमुख AI हस्तियों द्वारा विकास को धीमा करने की मांग के बाद अमेरिकी स्टॉक वायदा सोमवार शाम को सपाट रहा, जबकि निवेशक इस सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक का इंतजार कर रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों द्वारा विकास को धीमा करने की मांग के बाद अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स वायदा सोमवार शाम को लगभग सपाट कारोबार कर रहा था। इस घटनाक्रम ने टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव डाला, जबकि निवेशक इस सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक को लेकर भी सतर्क हैं।
Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, शाम 7:22 ET (23:22 GMT) तक, S&P 500 फ्यूचर्स 0.04% बढ़कर 7,695.50 अंक पर, नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.02% बढ़कर 29,456.50 अंक पर और डॉव जोन्स फ्यूचर्स 52,879.0 अंक पर सपाट थे। यह स्थिरता वॉल स्ट्रीट पर एक नकारात्मक सत्र के बाद आई, जहाँ मुख्य रूप से चिपमेकर जैसे AI-संबंधित क्षेत्रों में गिरावट देखी गई।
AI की चिंताओं से चिपमेकर शेयरों में गिरावट
सोमवार को वॉल स्ट्रीट पर सबसे बड़ी गिरावट चिपमेकर शेयरों में देखी गई, जहाँ SOX इंडेक्स 5% से अधिक गिर गया। Nvidia और Micron जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भारी नुकसान हुआ। यह बिकवाली कई प्रमुख AI कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के उस आह्वान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने मानवता के लिए इस तकनीक से उत्पन्न जोखिमों का हवाला देते हुए विकास को धीमा करने की मांग की थी।
निवेशकों के लिए, AI विकास में मंदी का मतलब चिप्स और डेटा सेंटरों पर कम खर्च हो सकता है। यह उन अरबों डॉलर के निवेश को खतरे में डाल सकता है जिसने पिछले तीन वर्षों में टेक्नोलॉजी शेयरों में एक बड़ी रैली को बढ़ावा दिया था। हालांकि, सॉफ्टवेयर शेयरों में कुछ बढ़त देखी गई, क्योंकि यह क्षेत्र हाल के महीनों में AI से संबंधित व्यवधानों के डर से प्रभावित था।
Adफेड की बैठक और तेल की कीमतें बढ़ा रहीं चिंता
बाजार इस सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहा है, जिससे कारोबार में सतर्कता बनी हुई है। विश्लेषकों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। यह अनुमान लगातार बनी हुई महंगाई (sticky inflation) के संकेतों के बीच आया है, जिसके बारे में नीति निर्माताओं ने पहले ही चेतावनी दी थी।
इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं, जो महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं और फेड को सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर कर सकती हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में व्यवधान के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हो रही है।