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अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले किए, बंदर अब्बास बंदरगाह को बनाया निशाना

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Jul 16, 20262 min read
अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले किए, बंदर अब्बास बंदरगाह को बनाया निशाना

Summary

अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर ईरान पर हमलों की नवीनतम श्रृंखला पूरी कर ली है। इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थित प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास को भी निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।

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Background

अमेरिकी सेना ने बुधवार देर रात पुष्टि की कि उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर ईरान के खिलाफ हमलों की नवीनतम श्रृंखला पूरी कर ली है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों में ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।

हमलों का विवरण और लक्ष्य

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान में कहा कि हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था। बयान के अनुसार, प्रमुख लक्ष्यों में शामिल थे:

  • ईरानी कमांड सेंटर और वायु रक्षा स्थल
  • मिसाइल और ड्रोन से जुड़ी क्षमताएं
  • तटीय निगरानी सुविधाएं

बयान में इस बात की पुष्टि की गई कि हमलों में बंदर अब्बास को निशाना बनाया गया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थित ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह और नौसेना तथा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का एक प्रमुख केंद्र है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी सेना ने ग्रेटर तुन्ब द्वीप पर तटीय रक्षा और क्रूज मिसाइल साइटों पर भी 90 मिनट तक हमला किया।

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भू-राजनीतिक संदर्भ और बाजार पर प्रभाव

यह सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद शुरू हुए व्यापक संघर्ष का हिस्सा है। इस युद्ध ने पहले ही वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। संघर्ष के कारण हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं, जिससे मानवीय संकट पैदा हो गया है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस सप्ताह ईरानी ऊर्जा लक्ष्यों और अगले सप्ताह पुलों पर हमला करने की धमकी दोहराई थी। अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है। निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए, इस बढ़ते तनाव का मतलब ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में निरंतर व्यवधान और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का खतरा है।

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