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अमेरिकी महंगाई दर 3.5% पर आई, लेकिन 2020 से कीमतें 28.5% बढ़ीं

Summary
जून 2026 में अमेरिकी CPI मुद्रास्फीति घटकर 3.5% हो गई, लेकिन 2020 के बाद से कीमतों में 28.5% की कुल वृद्धि उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर दबाव डाल रही है, जिससे वास्तविक लाभ लगभग समाप्त हो गया है।
जून 2026 में अमेरिकी उपभोक्ता कीमतें साल-दर-साल 3.5% बढ़ीं, जो मई के 4.2% के आंकड़े से कम है। हालांकि यह धीमी वृद्धि दर पहली नजर में राहत भरी लग सकती है, लेकिन यह एक बड़ी सच्चाई को छुपाती है: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) अब 2020 के आधार स्तर से 28.5% ऊपर है, जिसका अर्थ है कि अमेरिकी छह साल पहले की तुलना में रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं के लिए लगभग एक तिहाई अधिक भुगतान कर रहे हैं।
आंकड़ों के पीछे की कहानी
मुद्रास्फीति की दर में कमी और कीमतों के कुल स्तर में वृद्धि के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के बाद से सांकेतिक वेतन वृद्धि लगभग 27% हुई है। इसका मतलब है कि वेतन वृद्धि कीमतों में हुई 28.5% की वृद्धि से मामूली रूप से पीछे है, जिससे अधिकांश श्रमिकों की क्रय शक्ति में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ है।
इसके अलावा, आधिकारिक आंकड़े उपभोक्ताओं पर पड़ रहे वास्तविक बोझ को पूरी तरह से नहीं दर्शाते हैं। "श्रिंकफ्लेशन" (पैकेज का आकार घटाना लेकिन कीमत वही रखना) और "स्किम्फ्लेशन" (उत्पाद की गुणवत्ता कम करना) जैसी प्रथाएं लागत को बढ़ा रही हैं, जिन्हें श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की कार्यप्रणाली पूरी तरह से पकड़ नहीं पाती है। उदाहरण के लिए, डोरिटोस चिप्स के बैग का वजन 9.75 औंस से घटाकर 9.25 औंस कर दिया गया, जबकि कीमत वही रही, जो प्रभावी रूप से प्रति औंस 5.4% की मूल्य वृद्धि है जो CPI में दिखाई नहीं देती।
जून की नरमी का आधार और भविष्य का दृष्टिकोण
जून के आंकड़ों में नरमी लगभग पूरी तरह से ऊर्जा की कीमतों में 5.7% की मासिक गिरावट के कारण थी। रॉयटर्स के अनुसार, यह गिरावट ईरान में एक संक्षिप्त युद्धविराम के कारण हुई थी, जो अब समाप्त हो गया है। 14 जुलाई तक गैसोलीन की कीमतें फिर से बढ़ रही थीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि जुलाई में मुद्रास्फीति फिर से बढ़ सकती है।
AdBMO कैपिटल मार्केट्स के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री स्कॉट एंडरसन ने रॉयटर्स को बताया, "ईरान युद्धविराम के कारण ऊर्जा की कीमतों में गिरावट आई। लेकिन खाड़ी में लड़ाई फिर से शुरू होने और जुलाई में ऊर्जा की कीमतें बढ़ने के साथ, इस साल किसी समय दर में बढ़ोतरी का जोखिम अधिक है।"
फेडरल रिजर्व का रुख और बाजार पर असर
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने कांग्रेस के सामने गवाही देते हुए स्पष्ट किया कि "कीमतें बहुत अधिक हैं" और केंद्रीय बैंक "लगातार ऊंची मुद्रास्फीति को बर्दाश्त नहीं करेगा।" यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम है।
बाजार वर्तमान में सितंबर में दर वृद्धि की लगभग 60% संभावना का अनुमान लगा रहे हैं। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि अनिश्चितता बनी हुई है और जुलाई की CPI रिपोर्ट भविष्य की दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। यदि ऊर्जा की ऊंची कीमतें जुलाई के आंकड़ों में परिलक्षित होती हैं, तो जून की नरमी एक अस्थायी राहत साबित हो सकती है, न कि एक स्थायी प्रवृत्ति।