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यूक्रेन का रूसी तेल रिफाइनरी और प्लेटफॉर्म पर ड्रोन हमला; रूस ने नागरिक शिविर पर हमले का आरोप लगाया

Summary
यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन का उपयोग करके रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिसमें एक तेल रिफाइनरी और कैस्पियन सागर में एक तेल प्लेटफॉर्म शामिल है। वहीं, रूस ने यूक्रेन पर एक पर्यटक शिविर पर हमला करने का आरोप लगाया है जिसमें 11 नागरिकों की मौत हो गई।
यूक्रेन-रूस संघर्ष और तेज हो गया है, क्योंकि यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया है। इसके जवाब में, रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन पर एक पर्यटक शिविर पर घातक हमला करने का आरोप लगाया है, जिसमें बच्चों सहित कई नागरिक मारे गए।
रूस का आरोप और यूक्रेन की जवाबी कार्रवाई
रूसी अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन के ज़ापोरिज्जिया क्षेत्र के रूसी-नियंत्रित हिस्से में एक हॉलिडे कैंप पर रात भर हुए हमले में 11 लोग मारे गए, जिनमें चार बच्चे भी शामिल थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस द्वारा नियुक्त गवर्नर येवगेनी बालित्स्की ने कीव पर जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इस हमले में 16 अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है। यूक्रेन ने इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है।
इसके विपरीत, यूक्रेन ने अपनी लंबी दूरी की हमलावर क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए कई सफल हमलों की घोषणा की है। ये हमले रूस के युद्ध प्रयासों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं।
ऊर्जा और नौवहन ठिकानों पर हमले
यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) ने पुष्टि की है कि उसके ड्रोन ने रूस के महत्वपूर्ण ऊर्जा और रसद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इन हमलों में शामिल हैं:
Ad- कैस्पियन सागर में तेल प्लेटफॉर्म: रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनी लुकोइल (Lukoil) से संबंधित फिलानोव्स्की तेल प्लेटफॉर्म पर हमला किया गया। यह प्लेटफॉर्म रूस के सबसे बड़े कैस्पियन तेल क्षेत्र का हिस्सा है।
- साइबेरियाई तेल रिफाइनरी: यूक्रेनी क्षेत्र से 2,000 किलोमीटर (1,250 मील) से अधिक दूर साइबेरिया के ट्यूमेन क्षेत्र में एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई।
- मालवाहक जहाज: SBU ने यह भी कहा कि कैस्पियन सागर में दो मालवाहक जहाजों, पोर्ट ओल्या 2 और बेगी पर हमला किया गया, जिनके बारे में माना जाता है कि वे रूस और ईरान के बीच सैन्य कार्गो ले जा रहे थे।
इन हमलों से पता चलता है कि यूक्रेन अब युद्ध के मैदान से बहुत दूर स्थित ठिकानों को भी निशाना बनाने में सक्षम है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों का सीधा असर रूस की अर्थव्यवस्था और युद्ध को वित्तपोषित करने की उसकी क्षमता पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
दोनों पक्षों द्वारा शिपिंग को निशाना बनाना संघर्ष के एक नए चरण का संकेत देता है, जहां सैन्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करना एक प्रमुख लक्ष्य बन गया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसके ड्रोन ने काला सागर में एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाया जो यूक्रेनी सेना के लिए सैन्य कार्गो ले जा रहा था। रूस और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग, विशेष रूप से ड्रोन प्रौद्योगिकी में, इस संघर्ष में एक और जटिल भू-राजनीतिक परत जोड़ता है।