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ट्रम्प ने बाइडन के कार्यकाल में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयासों को समाप्त करने के लिए नए ईंधन दक्षता नियमों की घोषणा की।

Summary
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि उन्होंने नए ईंधन दक्षता मानकों को मंजूरी दे दी है, जिनका उद्देश्य बाइडेन प्रशासन की उन नीतियों को पलटना है जिन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा दिया था। सोशल मीडिया पर घोषित यह कदम अमेरिकी ऑटोमोटिव नियामक नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने नए ईंधन दक्षता मानकों को मंजूरी दे दी है, जिनका उद्देश्य बाइडेन प्रशासन द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयासों को रोकना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीतिगत बदलाव का विस्तृत विवरण उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में दिया गया।
घोषणा
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि नए नियम वाहन निर्माण लागत को कम करेंगे और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाएंगे। उन्होंने लिखा, "ये नए मानक अमेरिका में कार निर्माण में होने वाली बर्बादी को खत्म करेंगे। इसका मतलब है कम कीमतें, जिससे परिवारों को एक नई, सुंदर और सुरक्षित कार पर हजारों डॉलर की बचत होगी।"
पिछली नीति में बदलाव
यह कदम राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में लागू की गई नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। बाइडेन प्रशासन ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और बिक्री को बढ़ाने के लिए वाहन निर्माताओं को प्रोत्साहित करने हेतु ईंधन दक्षता मानकों को उत्तरोत्तर सख्त करने का प्रयास किया था।
Adट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने इस नीतिगत बदलाव का संकेत देते हुए कहा था कि वह जल्द ही वाहनों के ईंधन दक्षता मानकों को काफी कम करने की घोषणा करेगा। इस कार्रवाई से वाहन निर्माताओं पर आंतरिक दहन इंजनों से दूर जाने का नियामक दबाव कम हो जाता है।
संभावित बाज़ार प्रभाव
इस नियामक बदलाव से अमेरिकी और विदेशी ऑटोमोबाइल निर्माताओं के रणनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन आ सकता है। सख्त उत्सर्जन नियमों की आशंका में इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में पर्याप्त पूंजी निवेश करने वाली कंपनियों को अपनी दीर्घकालिक योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता हो सकती है। ढील दिए गए मानकों से पारंपरिक गैसोलीन-चालित वाहनों के निर्माताओं के लिए अनुपालन लागत कम हो सकती है, जिससे ऑटो क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक गतिशीलता प्रभावित हो सकती है।