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टाटा पावर की नजर यूरोपीय सौर बाजार पर, पहले निर्यात की तैयारी

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Jul 27, 20262 min read
टाटा पावर की नजर यूरोपीय सौर बाजार पर, पहले निर्यात की तैयारी

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टाटा पावर पहली बार यूरोप में सौर सेल और पैनल निर्यात करने की योजना बना रही है, क्योंकि यूरोपीय संघ चीनी निर्माताओं पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

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टाटा पावर ने पहली बार यूरोप में सौर सेल और पैनल निर्यात करने की योजना बनाई है, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है। यह घोषणा कंपनी के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने सोमवार को एक मीडिया कॉल के दौरान की, जिसमें यूरोपीय संघ द्वारा चीनी निर्माताओं पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयासों को एक बड़े अवसर के रूप में उजागर किया गया।

यूरोपीय बाजार में अवसर

सीईओ प्रवीर सिन्हा के अनुसार, कंपनी किसी एक यूरोपीय देश को 2-3 गीगावाट (GW) तक सौर उपकरण निर्यात करने की क्षमता देखती है, हालांकि उन्होंने लक्षित बाजार के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय संघ अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है।

  • कंसल्टेंसी फर्म ग्रीन हॉर्स एडवाइजरी के अनुसार, 2023 में यूरोपीय संघ में स्थापित लगभग 94% सौर मॉड्यूल और सेल चीन से आयात किए गए थे।
  • यूरोपीय संघ का 'नेट-ज़ीरो इंडस्ट्री एक्ट' इस निर्भरता को कम करने के लिए बनाया गया है। इसके तहत, इटली जैसे देशों ने पिछले साल चीनी उपकरणों के बिना बनी सौर परियोजनाओं के लिए अपना बाजार खोल दिया है।

भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता

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टाटा पावर इस अवसर का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। कंपनी के पास वर्तमान में एकीकृत सेल और मॉड्यूल के निर्माण की 4.9 GW की क्षमता है। इसके अलावा, कंपनी की योजना सोलर इनगॉट्स और वेफर्स के लिए 10 GW तक की विनिर्माण क्षमता बनाने की है।

यह केवल टाटा पावर की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के बढ़ते सौर विनिर्माण क्षेत्र को भी दर्शाता है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, भारत में लगभग 200 GW की मॉड्यूल बनाने की क्षमता और लगभग 30 GW की सेल क्षमता है। कई भारतीय निर्माता अब यूरोपीय बाजार में निर्यात के अवसर तलाश रहे हैं।

व्यापार समझौते का प्रभाव

इस साल की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए एक व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को और मदद मिलने की उम्मीद है। इस सौदे के तहत अधिकांश वस्तुओं पर टैरिफ कम कर दिए गए हैं, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय सौर उपकरण यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।

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