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ड्रोन हमलों के बाद रूस का तेल शोधन 21 साल के निचले स्तर पर गिरा

Summary
कमोडिटी डेटा फर्म केप्लर के अनुसार, यूक्रेनी ड्रोन हमलों से हुए नुकसान के कारण रूस का तेल शोधन 21 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जिससे देश की प्रसंस्करण क्षमता का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण हुए नुकसान के बाद रूस का तेल शोधन उत्पादन 21 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है। कमोडिटी डेटा फर्म केप्लर ने मंगलवार को बताया कि देश की रिफाइनरियों में कच्चे तेल का प्रसंस्करण गिरकर लगभग 3.80 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया है।
हमलों का पैमाना और तत्काल प्रभाव
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में रिफाइनरी का डाउनटाइम और हमला की गई क्षमता लगभग 4.3 मिलियन बैरल प्रति दिन है। यह गिरावट दो दशकों में सबसे गंभीर है, जो रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की गंभीरता को दर्शाती है।
अगस्त 2025 से अब तक कम से कम 25 रूसी रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया गया है। इन हमलों के परिणामस्वरूप, रूस की शोधन क्षमता का लगभग 58% प्रभावित हुआ है, और अनुमानित 1.5 मिलियन से 2.0 मिलियन बैरल प्रति दिन की प्रसंस्करण क्षमता प्रभावी रूप से ऑफ़लाइन है।
भविष्य का दृष्टिकोण और तकनीकी चुनौतियां
हमलों ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है, जिसमें क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट, सेकेंडरी प्रोसेसिंग यूनिट, स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन शामिल हैं। चल रही मरम्मत और लगातार ड्रोन हमलों के खतरे के कारण रिफाइनरी संचालन बाधित हो रहा है।
Adकेप्लर का अनुमान है कि तीसरी तिमाही के दौरान रूसी रिफाइनरी संचालन काफी हद तक मंद रहेगा। फर्म को उम्मीद है कि अगस्त में रखरखाव में कमी आने पर उत्पादन मामूली रूप से बढ़कर लगभग 4.3 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगा। हालांकि, केप्लर ने यह भी चेतावनी दी है कि लगातार ड्रोन हमलों से इस पूर्वानुमान के लिए गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
बाज़ार पर संभावित असर
रूस के परिष्कृत उत्पादों के उत्पादन में यह महत्वपूर्ण कमी वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को प्रभावित कर सकती है। डीज़ल और गैसोलीन जैसे परिष्कृत ईंधनों की आपूर्ति में कमी आ सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर इन उत्पादों की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करती है, क्योंकि रूस परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। बाज़ार विश्लेषक इस बात पर करीब से नज़र रख रहे हैं कि यह उत्पादन बाधा वैश्विक ईंधन की कीमतों को कैसे प्रभावित करेगी।