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RBI के विदेशी मुद्रा उपायों से $20 बिलियन से अधिक का प्रवाह, भुगतान संतुलन को मिला सहारा

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सोमवार को कहा कि पिछले महीने शुरू किए गए विशेष विदेशी मुद्रा उपायों के माध्यम से देश में $20 बिलियन से अधिक का पूंजी प्रवाह आकर्षित हुआ है। इन कदमों का उद्देश्य भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत करना और गिरते रुपये को सहारा देना था।
उपायों का विवरण और परिणाम
RBI के अनुसार, 8 जून से 17 जुलाई के बीच इन उपायों से कुल $20.7 बिलियन की राशि प्राप्त हुई। यह राशि विभिन्न माध्यमों से जुटाई गई, जिसका उद्देश्य बैंकों और कंपनियों द्वारा विदेशी फंड जुटाने को प्रोत्साहित करना था।
पूंजी प्रवाह का मुख्य स्रोत इस प्रकार है:
- $17.41 बिलियन: यह राशि बैंकों द्वारा जुटाई गई विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR) जमा के माध्यम से आई, जिसे RBI के साथ शून्य-लागत वाली स्वैप सुविधा के तहत बदला गया। इस व्यवस्था ने बैंकों को ऐसी जमाओं पर बेहतर रिटर्न देने की अनुमति दी।
- $1.34 बिलियन: यह बाह्य वाणिज्यिक उधार (External Commercial Borrowings) के लिए स्वैप सुविधाओं के माध्यम से प्राप्त हुआ।
- $1.97 बिलियन: यह अधिकृत ऋणदाताओं द्वारा विदेशी विदेशी मुद्रा उधार (Overseas Foreign Currency Borrowings) के माध्यम से जुटाया गया।
Adसंदर्भ और बाजार के लिए मायने
RBI ने ये उपाय उस समय पेश किए थे जब भारतीय रुपया लगातार दबाव में था और डॉलर के मुकाबले कई बार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत के लिए लगातार तीसरे वर्ष भुगतान संतुलन घाटे का सामना करने का खतरा बढ़ गया था, जिससे चिंताएं और बढ़ गई थीं।
यह सफल पूंजी प्रवाह बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलेगा, बल्कि रुपये पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह RBI की मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने की क्षमता में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।