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फेड और तेल की कीमतों से डॉलर को मिला सहारा, पाउंड में गिरावट

Summary
बुधवार को अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखी गई, जिसका मुख्य कारण ईरान पर अमेरिकी हमले, शेयर बाजारों में घबराहट और फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख की उम्मीदें थीं। इसके परिणामस्वरूप, ब्रिटिश पाउंड और यूरो दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
बुधवार को विदेशी मुद्रा बाजार में स्टर्लिंग पाउंड और यूरो के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में तेजी आई। यह मजबूती ईरान पर नए अमेरिकी हमलों के बाद सुरक्षित-पनाहगाह के रूप में डॉलर की मांग बढ़ने और शेयर बाजारों में अनिश्चितता के कारण देखी गई। निवेशक दिन में बाद में जारी होने वाले फेडरल रिजर्व की बैठक के विवरण का भी इंतजार कर रहे हैं, जिससे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख के संकेत मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, GBP/USD 0.07% गिरकर $1.3343 पर और EUR/USD 0.08% फिसलकर $1.1403 पर आ गया। वाशिंगटन की तेहरान के खिलाफ कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतों में लगभग 6% की बढ़ोतरी हुई और यह $79 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे डॉलर को और समर्थन मिला। विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर की सुरक्षित-पनाहगाह वाली अपील और फेड के आक्रामक रुख का महत्व डॉलर की मजबूती के लिए अहम है।
फेडरल रिजर्व अपनी जून की बैठक का विवरण (मिनट्स) जारी करने वाला है, जिससे उम्मीद है कि आक्रामक संदेश की पुष्टि होगी और डॉलर की गति को मजबूती मिलेगी। ING के एक रणनीतिकार फ्रांसेस्को पेसोले के अनुसार, "इक्विटी में घबराहट ने कल डॉलर को कुछ समर्थन दिया - यह ग्रीनबैक की बहुत मजबूत सुरक्षित-पनाहगाह अपील की याद दिलाता है।"
Adहालांकि, स्टर्लिंग को बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों से कुछ सहारा मिला है। तेल की कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण बाजार अब साल के अंत तक 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की पूरी उम्मीद कर रहा है। वहीं, यूरो पर फ्रांसीसी राजनीतिक घटनाक्रमों का कोई खास असर नहीं दिखा और विश्लेषकों का मानना है कि EUR/USD के लिए गिरावट का जोखिम बना हुआ है।