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ईरान के हमले के बाद तेल की कीमतों में $1 से अधिक की उछाल

Summary
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में 1 डॉलर से अधिक की वृद्धि हुई, जब ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं।
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगातार चौथे सत्र में तेजी आई, जिसमें $1 प्रति बैरल से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यह उछाल ईरान द्वारा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों पर मिसाइल हमले करने की खबरों के बाद आया है, जिससे प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
कीमतों में तेज बढ़ोतरी
रॉयटर्स के अनुसार, 0001 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा $1.57 या 1.6% बढ़कर $99.49 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $1.60 या 1.72% की बढ़त के साथ $94.63 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
यह मूल्य वृद्धि एक बड़े रुझान का हिस्सा है, जिसमें अगस्त की शुरुआत से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में एक चौथाई की वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि दोनों देशों के बीच छह महीने पुराने संघर्ष के स्थायी समाधान की उम्मीदें कम होने के कारण हुई है।
बढ़ता सैन्य टकराव
Adईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी तेल टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में दो अमेरिकी विध्वंसकों और जॉर्डन के अल अज़राक में एक अमेरिकी अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। हालांकि, जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी ने सेना के हवाले से बताया कि उसके वायु-रक्षा प्रणालियों ने ईरानी क्षेत्र से दागी गई 20 में से 18 मिसाइलों को नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें निर्जन क्षेत्रों में गिरीं और कोई हताहत नहीं हुआ।
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को चेतावनी दी कि अमेरिकी युद्धपोतों पर हमलों के प्रयास के जवाब में अमेरिका ईरानी तेल टैंकरों पर हमले जारी रखेगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को कहा कि उसकी सेना ने 8 सितंबर को पांच ईरानी कच्चे तेल के वाहक जहाजों को नष्ट कर दिया था।
बाजार के लिए निहितार्थ
मध्य पूर्व में किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल-उत्पादक क्षेत्रों में से एक से आपूर्ति में संभावित व्यवधान का डर पैदा करता है। ईरान-अमेरिका संघर्ष का बढ़ना आपूर्ति श्रृंखलाओं को खतरे में डाल सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। निवेशक इस क्षेत्र के घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि आगे किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से कीमतों में और तेजी आ सकती है।