Story
ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका से कच्चे तेल में लगभग 1% की गिरावट

Summary
दो सप्ताह की मजबूत बढ़त के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1% की गिरावट आई, क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर नए, कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी की, जिससे बाजार में मुनाफावसूली भी देखी गई।
लगातार दो हफ्तों की मजबूत तेजी के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट अमेरिका द्वारा ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी की खबरों के बीच आई है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
कीमतों में गिरावट
सोमवार के शुरुआती कारोबार में, ब्रेंट क्रूड वायदा 0.9% गिरकर $93.51 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 1.1% फिसलकर $86.08 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह गिरावट पिछले दो हफ्तों में 5% से अधिक की बढ़त के बाद आई है, जिससे निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
प्रतिबंधों का बढ़ता दबाव
अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सोमवार को ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों का अनावरण करेगा। फाइनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे ईरान के लिए "आर्थिक डी-डे" बताया है। इन प्रतिबंधों की औपचारिक घोषणा सोमवार को अमेरिकी समयानुसार दोपहर 2:00 बजे (भारतीय समयानुसार मंगलवार देर रात) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में होने की उम्मीद है।
Adइस कदम से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। संघर्ष से पहले, दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चेतावनी दी है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि यदि "आर्थिक युद्ध" जारी रहा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य या "फारस की खाड़ी में कहीं से भी तेल की एक बूंद" का निर्यात नहीं होने दिया जाएगा।
बाजार पर प्रभाव
बाजार इस क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष और आपूर्ति में और अधिक बाधाओं की आशंका जता रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण पहले ही तेल पारगमन में गिरावट आ चुकी है। इसके अलावा, संघर्ष के अन्य क्षेत्रों में फैलने का भी खतरा है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है, जिससे तनाव लाल सागर क्षेत्र तक फैल गया है। निवेशक इन भू-राजनीतिक गतिविधियों पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।