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आपूर्ति संकट के बीच उत्तर-पश्चिम यूरोप में गैसोलीन मार्जिन बढ़कर $39.78 प्रति बैरल पर पहुँचा

Summary
उत्तर-पश्चिम यूरोप में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण बुधवार को गैसोलीन रिफाइनिंग मार्जिन 53 सेंट बढ़कर $39.78 प्रति बैरल हो गया। यह वृद्धि रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और वैश्विक ईंधन बाजार में व्यवधानों के बीच हुई है।
उत्तर-पश्चिम यूरोप में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण बुधवार को गैसोलीन रिफाइनिंग मार्जिन में 53 सेंट की वृद्धि हुई, जो $39.78 प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गया। यह बढ़ोतरी क्षेत्र में ईंधन की उपलब्धता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।
बाजार की गतिविधियां और सौदे
बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि तेज रही, जिससे आपूर्ति की कमी की स्थिति और स्पष्ट हो गई। दिन के कारोबार में कुल 16,000 मीट्रिक टन E5 गैसोलीन बार्ज का सौदा हुआ।
- E5 गैसोलीन: इसमें विक्रेता ट्राफिगुरा (Trafigura) और इक्विनोर (Equinor) थे, जबकि खरीदारों में टोटल एनर्जीज ट्रेडिंग (TOTSA), वारो एनर्जी (Varo), एमबी एनर्जी (MB Energy) और पेट्रोइनियोस (Petroineos) शामिल थे।
- E10 गैसोलीन: इसके अतिरिक्त, 8,000 टन E10 गैसोलीन बार्ज का भी कारोबार हुआ। एक्सॉनमोबिल (Exxon), सहारा (Sahara) और शेल (Shell) ने वारो एनर्जी और ट्राफिगुरा को इसकी बिक्री की।
आपूर्ति में कमी के मुख्य कारण
Adआपूर्ति में यह कमी मुख्य रूप से वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का परिणाम है। शिपिंग डेटा और व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, रूस ने इस महीने एशियाई समुद्री मार्गों के माध्यम से लगभग 270,000 मीट्रिक टन परिष्कृत ईंधन उत्पादों का आयात किया है। यह आयात यूक्रेनी हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों को हुए नुकसान से उत्पन्न ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए किया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और ईंधन आपूर्तिकर्ताओं ने बताया है कि मॉस्को के कई गैस स्टेशनों पर गैसोलीन की खरीद पर फिर से सीमाएं लागू कर दी गई हैं। इसका कारण रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले और गर्मियों के मौसम में बढ़ी हुई मांग है, जिससे आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ा है।
वैश्विक संदर्भ और प्रभाव
ईरान और यूक्रेन में संघर्ष के कारण उत्पन्न हुए वैश्विक ईंधन आपूर्ति व्यवधानों का लाभ भारत और अमेरिका के तेल रिफाइनरों को मिल रहा है। इन संघर्षों ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है और उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों के ड्राइविंग सीजन के दौरान आयातकों की ओर से मजबूत मांग पैदा की है, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हुआ है।