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गोपनीयता पर विवाद के बाद मेटा ने AI इमेज फीचर लॉन्च के कुछ ही दिनों में वापस लिया

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने अपने एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर को लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद बंद कर दिया है। यह फैसला गोपनीयता संबंधी चिंताओं और हॉलीवुड यूनियन सहित उपयोगकर्ताओं की ओर से हुई भारी आलोचना के बाद शुक्रवार को लिया गया।
क्या हुआ?
मेटा ने मंगलवार को म्यूज़ इमेज (Muse Image) नामक अपना पहला इमेज-जनरेशन मॉडल लॉन्च किया था। यह फीचर कंपनी के मेटा AI चैटबॉट में इंटीग्रेटेड था और उपयोगकर्ताओं को सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट्स की तस्वीरों का उपयोग करके नई छवियां बनाने की अनुमति देता था।
हालांकि, लॉन्च के तुरंत बाद ही इस पर विवाद खड़ा हो गया। शुक्रवार को एक बयान जारी कर मेटा ने कहा, "हमें मिली प्रतिक्रिया से पता चला कि यह फीचर उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, इसलिए अब यह उपलब्ध नहीं है।" कंपनी ने कहा कि उसका इरादा एक उपयोगी रचनात्मक टूल प्रदान करना और लोगों को उनके कंटेंट के उपयोग पर नियंत्रण देना था।
विवाद और आलोचना की वजह
इस फीचर का सबसे बड़ा विरोध इसकी ऑटोमैटिक ऑप्ट-इन (automatic opt-in) नीति को लेकर था, जिसका मतलब था कि उपयोगकर्ताओं को इस फीचर से बाहर रहने के लिए खुद सेटिंग्स बदलनी पड़ती थीं। कई लोगों ने इसे गोपनीयता का उल्लंघन माना।
Ad- हॉलीवुड की प्रतिक्रिया: एमी-विजेता अभिनेत्री हन्ना आइनबाइंडर (Hannah Einbinder) ने इंस्टाग्राम पर इस फीचर की आलोचना की। इसके अलावा, अभिनेताओं और मीडिया पेशेवरों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनियन SAG-AFTRA ने भी अपने सदस्यों से इस फीचर से ऑप्ट-आउट करने का आग्रह किया था।
SAG-AFTRA ने कहा कि उपयोगकर्ताओं की छवियों के ऐसे उपयोग के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी 'ऑप्ट-इन' के अलावा कुछ भी अस्वीकार्य है। मेटा के फैसले के बाद, यूनियन ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे एक "जिम्मेदार कार्रवाई" बताया।
उद्योग और निवेशकों के लिए संकेत
मेटा का यह फैसला प्रौद्योगिकी कंपनियों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है कि वे AI फीचर्स के लिए उपयोगकर्ताओं के डेटा का उपयोग कैसे करते हैं, इस पर स्पष्ट नियंत्रण प्रदान करें। यह घटनाक्रम दिखाता है कि उपयोगकर्ता और उद्योग समूहों की तरफ से आने वाली कड़ी प्रतिक्रिया बड़ी तकनीकी कंपनियों को भी अपनी नई पहलों पर जल्दी पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है।
यह मामला भविष्य में AI उत्पादों के लॉन्च के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है, जहाँ कंपनियाँ विवादास्पद 'ऑटो-ऑप्ट-इन' के बजाय 'डिफ़ॉल्ट रूप से ऑप्ट-इन' मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित हो सकती हैं। निवेशकों के लिए, यह AI के विकास से जुड़े नियामक और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिमों को उजागर करता है।