Story
सेबी ने स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड के नियमों में ढील देने का प्रस्ताव दिया

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉर्पोरेशनों और डिपॉजिटरी के बोर्ड में निदेशकों की नियुक्ति से संबंधित नियमों में ढील देने का प्रस्ताव रखा। नियामक का कहना है कि मौजूदा सख्त नियमों के कारण इन महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए योग्य और अनुभवी पेशेवर ढूंढना मुश्किल हो गया है।
प्रस्तावित बदलाव क्या हैं?
सेबी के प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य उन व्यक्तियों पर लगे प्रतिबंधों को कम करना है जो स्टॉक ब्रोकरों या अन्य बाजार मध्यस्थों से जुड़े हैं। नियामक ने यह बदलाव इसलिए सुझाया है क्योंकि मौजूदा नियम अप्रत्यक्ष संबंधों के आधार पर भी उम्मीदवारों को अयोग्य ठहरा सकते हैं, खासकर बड़े कारोबारी समूहों में जहां कई स्वतंत्र रूप से काम करने वाली सहायक कंपनियां होती हैं।
प्रस्ताव के तहत, 'व्यापक रूप से धारित कंपनियों' (widely held companies) के निदेशकों को बाजार संस्थानों के बोर्ड में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी, भले ही उनके समूह की कोई अन्य कंपनी ब्रोकर, क्लियरिंग सदस्य या डिपॉजिटरी प्रतिभागी के रूप में काम करती हो।
- व्यापक रूप से धारित कंपनी की परिभाषा: सेबी ने ऐसी कंपनी को 'व्यापक रूप से धारित' के रूप में परिभाषित करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें कोई भी निजी शेयरधारक, व्यक्तिगत रूप से या संबंधित पक्षों के साथ मिलकर, 10% या अधिक हिस्सेदारी या नियंत्रण नहीं रखता हो।
- इस गणना में सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरधारकों को शामिल नहीं किया जाएगा।
Adनियमों में ढील की आवश्यकता क्यों?
सेबी ने स्वीकार किया कि मौजूदा नियम बाजार मध्यस्थों के साथ किसी भी तरह के संबंध को लेकर बहुत व्यापक हैं, जिससे संभावित उम्मीदवारों का दायरा सीमित हो जाता है। नियामक का मानना है कि प्रस्तावित बदलाव से बाजार संस्थानों के बोर्ड में अधिक अनुभवी और योग्य पेशेवरों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
इस कदम से बाजार अवसंरचना संस्थानों के प्रशासन (governance) को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। एक व्यापक टैलेंट पूल से बेहतर रणनीतिक दिशा और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है, जो अंततः बाजार की दक्षता और निवेशकों के विश्वास के लिए सकारात्मक होगा।