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भारत की अमेरिका को चेतावनी: रूसी तेल पर प्रतिबंध विधेयक से द्विपक्षीय संबंधों को हो सकता है नुकसान

भारत ने गुरुवार को चेतावनी दी कि रूसी तेल के खरीदारों पर प्रतिबंध लगाने वाला एक अमेरिकी विधेयक नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बाधित कर सकता है। यह बयान अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) द्वारा इस कानून को पारित किए जाने के बाद आया है।
विधेयक और भारत की चिंता
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर हाल के महीनों में विभिन्न अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा की गई है। मंत्रालय के अनुसार, भारत ने द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर इसके संभावित प्रभावों को स्पष्ट कर दिया है। यह पहली बार है जब नई दिल्ली ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि यह अमेरिकी विधेयक वाशिंगटन के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।" बयान में यह भी कहा गया कि भारत बदलते बाजार की गतिशीलता के आधार पर "विविध स्रोतों" से खरीद जारी रखेगा।
Adसंभावित प्रभाव और बाजार की स्थिति
यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस से अंतिम मंजूरी पा चुका है, क्योंकि यह पिछले महीने सीनेट से भी आसानी से पारित हो गया था। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की नई शक्तियां देता है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले दिनों में इस कानून पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं।
इन शक्तियों के कारण रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के पांच सबसे बड़े खरीदारों, जिनमें चीन, भारत और अमेरिकी सहयोगी तुर्की शामिल हैं, पर नए टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। भारत वर्तमान में समुद्री मार्ग से रूसी कच्चे तेल का शीर्ष खरीदार है। ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सरकारी रिफाइनरियां पहले से ही आपूर्ति अनिश्चितता का सामना कर रही हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में लंबे समय से चल रहे संघर्ष के साथ-साथ रूसी खरीद पर सख्त अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका भी बढ़ गई है।