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रुपये में निर्यात भुगतान पर भी मिलेंगे व्यापारिक लाभ, सरकार ने नियमों में दी ढील

भारत ने अपनी मुद्रा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रुपये में निर्यात भुगतान से जुड़े नियमों में ढील दी है। इस बदलाव के बाद, निर्यातकों को रुपये में मिलने वाले भुगतान पर भी वही व्यापार नीति लाभ मिलेंगे जो अब तक केवल विदेशी मुद्रा में भुगतान पर मिलते थे।
नीति में प्रमुख बदलाव
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस संशोधन का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में भारतीय रुपये के उपयोग को बढ़ावा देना है।
इस बदलाव के तहत, अब कई प्रमुख लाभ मिलेंगे:
- निर्यातक अब विदेशी खरीदारों के साथ अनुबंध, चालान (invoice) और भुगतान भारतीय रुपये में कर सकते हैं।
- पहले के नियमों के तहत, ज़्यादातर मामलों में निर्यात आय को स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय मुद्रा (freely convertible currency) में ही प्राप्त करना अनिवार्य था, जिससे रुपये में व्यापार करने में बाधा आती थी।
- अब, अनुमोदित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से रुपये में प्राप्त निर्यात भुगतान भी व्यापार नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों के लिए पात्र होंगे और निर्यातकों के निर्यात दायित्वों (export obligations) की पूर्ति में गिने जाएंगे।
इस कदम का महत्व और संदर्भ
Adयह नीतिगत बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 2023 में जारी किए गए विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप है, जिसमें पहले ही सीमा-पार लेनदेन में रुपये के व्यापक उपयोग की अनुमति दी गई थी। सरकार का लक्ष्य धीरे-धीरे विदेशी मुद्राओं, विशेष रूप से अमेरिकी डॉलर पर व्यापारिक निर्भरता कम करना है।
यह कदम भारतीय मुद्रा को वैश्विक मंच पर एक विश्वसनीय और पसंदीदा व्यापारिक मुद्रा के रूप में स्थापित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। यह नियम नेपाल और भूटान को छोड़कर सभी देशों के साथ होने वाले व्यापार पर लागू होगा, जिनके लिए अलग द्विपक्षीय व्यवस्थाएं हैं।
एशियाई समाशोधन संघ (ACU) के नियम
एशियाई समाशोधन संघ (ACU) के सदस्य देशों, जिनमें बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं, के लिए अनुबंध आमतौर पर ACU द्वारा निर्धारित मुद्राओं में होते हैं। हालांकि, इन मामलों में भी भारतीय रिजर्व बैंक के विशेष निर्देश लागू हो सकते हैं। ACU अपने सदस्य देशों को बार-बार विदेशी मुद्रा हस्तांतरण की आवश्यकता को कम करते हुए, एक-दूसरे के साथ व्यापारिक लेन-देन का निपटान करने की सुविधा देता है।