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तेल की बढ़ती कीमतों से सोने में साप्ताहिक गिरावट, ब्याज दरों पर चिंताएँ बढ़ीं

शुक्रवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई और यह साप्ताहिक नुकसान की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी सख्त मौद्रिक नीति को लंबे समय तक जारी रख सकता है।
बाजार की चाल और मुख्य कारण
ताजा आंकड़ों के अनुसार, हाजिर सोना 0.2% गिर गया, जबकि सोना वायदा में 0.5% की गिरावट आई। दोनों अनुबंध इस सप्ताह लगभग 1.6% नीचे थे।
इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते तेल की कीमतों में आया उछाल है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वाणिज्यिक तेल टैंकरों पर कथित हमलों के बाद यह स्थिति बनी है, जिससे आपूर्ति संबंधी चिंताएँ बढ़ गई हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व
तेल की कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है, जो फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखने के लिए मजबूर कर सकता है। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्ति रखने की अवसर लागत को बढ़ा देती हैं, जिससे यह निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाता है।
Adहालांकि, ANZ के विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में संघर्ष के सीमित रहने की उम्मीदों से सोने को कुछ समर्थन मिला है। ओमान और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों द्वारा शांति की अपील से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पूर्ण संघर्ष से बचना चाहते हैं। इस सप्ताह जारी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स से भी यह पता चला है कि नीति निर्माता दरों के भविष्य को लेकर विभाजित थे, लेकिन मुद्रास्फीति के दबावों के बारे में चिंतित थे।
आगे की राह
अब निवेशकों का ध्यान अगले सप्ताह जारी होने वाले प्रमुख अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर है। मंगलवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और बुधवार को उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े आने वाले हैं।
ये आंकड़े मुद्रास्फीति की स्थिति पर और स्पष्टता प्रदान करेंगे और फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत कदमों को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों की दिशा पर पड़ेगा।