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तेल की कीमतों में उछाल से सोने में साप्ताहिक गिरावट, फेड की दरों पर चिंता बढ़ी

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में उछाल ने यह चिंता बढ़ा दी है कि मुद्रास्फीति ऊंची बनी रह सकती है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा है और यह साप्ताहिक गिरावट की ओर अग्रसर है। निवेशकों को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लगातार महंगाई से निपटने के लिए अपनी सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार पर असर
Investing.com की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस सप्ताह सोने की कीमतों में गिरावट आई है। यह तनाव तब बढ़ा जब ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कथित तौर पर तीन वाणिज्यिक तेल टैंकरों पर हमला किया गया। इस घटना के बाद, तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, जिससे मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं फिर से उभर आईं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान के खिलाफ सख्त बयानबाजी ने भी बाजार की अनिश्चितता को बढ़ाया है। हालांकि, ओमान और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों द्वारा तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं, जिससे बाजार को यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पूर्ण संघर्ष से बचना चाहते हैं। ANZ के विश्लेषकों ने कहा, "मध्य पूर्व संघर्ष के सीमित रहने की उम्मीदों पर सोने को कुछ समर्थन मिला है।"
Adफेडरल रिजर्व की नीति और आगामी डेटा
तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर मुद्रास्फीति पर पड़ता है, जो फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर निर्णयों को प्रभावित करता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि इससे गैर-ब्याज वाली संपत्ति रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है।
इस सप्ताह जारी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स से पता चला है कि नीति निर्माता दरों के भविष्य को लेकर विभाजित थे। रिपोर्ट के मुताबिक, हाजिर सोना और सोना वायदा दोनों अनुबंधों में इस सप्ताह लगभग 1.6% की गिरावट दर्ज की गई। अब बाजार का ध्यान अगले सप्ताह आने वाले प्रमुख अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर है, जिसमें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) शामिल हैं। ये आंकड़े फेड की भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।