Story

कच्चे तेल में गिरावट से जर्मन बॉन्ड यील्ड घटी, फेड और BoE की बैठकों पर नज़र

ENTHMSVIIDZHZH-TWJAKOHI
Jul 27, 20262 min read
कच्चे तेल में गिरावट से जर्मन बॉन्ड यील्ड घटी, फेड और BoE की बैठकों पर नज़र
Text size
Background

कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से मुद्रास्फीति की चिंताओं में कमी आई है, जिसके चलते सोमवार को यूरोजोन के सरकारी बॉन्ड यील्ड अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आ गए। यह नरमी एक ऐसे महत्वपूर्ण सप्ताह की शुरुआत में आई है जब दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति पर निर्णय लेने वाले हैं।

तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड का संबंध

सोमवार को कच्चे तेल के वायदा में 5% की गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा असर बॉन्ड बाजार पर देखने को मिला। यह गिरावट उन संकेतों के बाद आई कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका अपने सैन्य हमलों को रोकता है तो ईरान मध्य पूर्व के प्रमुख पारगमन मार्गों में हमले बंद कर देगा।

ऊर्जा की कीमतों में इस नरमी ने बॉन्ड निवेशकों को तत्काल राहत दी है। इससे उन आशंकाओं को बल मिला है कि ऊर्जा के झटके केंद्रीय बैंकों को अपनी मौद्रिक सख्ती के चक्र को लंबा करने के लिए मजबूर नहीं करेंगे।

  • दर-संवेदनशील जर्मन दो-वर्षीय यील्ड, जो यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति की उम्मीदों को दर्शाता है, गिरकर 2.77% पर आ गया।
  • वहीं, बेंचमार्क 10-वर्षीय जर्मन बंड यील्ड फिसलकर 3.13% पर पहुंच गया, जो अपने 15 साल के उच्चतम स्तर से नीचे है।

केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर बाजार की नजर

Sample IUX Markets – In-articleAd

बॉन्ड यील्ड में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब फिक्स्ड-इनकम निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर निर्णयों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी बेंचमार्क दरों को अपरिवर्तित रखेगा, लेकिन व्यापारी फेड चेयरमैन केविन वार्श की टिप्पणियों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे।

बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि क्या केंद्रीय बैंक अभी भी सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की योजना बना रहा है। इन टिप्पणियों से भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा का संकेत मिलेगा और बॉन्ड बाजारों पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

आगामी आर्थिक आंकड़े और दृष्टिकोण

इस सप्ताह जारी होने वाले यूरोजोन के व्यापक आर्थिक संकेतक भी यील्ड की चाल को प्रभावित करेंगे। निवेशकों की नजर यूरोजोन के दूसरी तिमाही के जीडीपी के शुरुआती आंकड़ों, जुलाई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों, बेरोजगारी के आंकड़ों और आर्थिक भावना रीडिंग पर होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी मुद्रास्फीति के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि ऊर्जा की कम लागत के साथ मूल्य दबाव कम हो रहा है, तो सरकारी यील्ड में और स्थिरता आ सकती है। इससे यूरोजोन की सरकारों के लिए कर्ज चुकाने का दबाव कम होगा और पूरे क्षेत्र के वाणिज्यिक ऋण बाजारों को राहत मिलेगी।

Back to latest news

LATEST