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ईसीबी के सख्त रुख से यूरोजोन बॉन्ड यील्ड कई साल के उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई है

यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के अधिकारियों की सख्त टिप्पणियों और लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण यूरोजोन सरकारी बॉन्ड यील्ड मंगलवार को मामूली गिरावट के बावजूद अपने कई साल के उच्चतम स्तर के करीब बनी रही। बाजार यह मानकर चल रहे हैं कि अल्पावधि में ब्याज दरें ऊंची ही रहेंगी।
प्रमुख यील्ड स्तर
बाजार में ब्याज दरों की उम्मीदों को दर्शाने वाली, जर्मनी की दो-वर्षीय बॉन्ड यील्ड थोड़ी गिरकर 2.75% पर आ गई। वहीं, बेंचमार्क मानी जाने वाली जर्मनी की 10-वर्षीय बंड यील्ड भी मामूली रूप से फिसलकर 3.10% पर पहुंच गई, जो 2011 के बाद से अपने उच्चतम स्तरों के बेहद करीब है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बॉन्ड बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन यील्ड कर्व में सीमित हलचल यह दर्शाती है कि बाजार में इस बात पर आम सहमति है कि केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में उधारी लागत को ऊंचा बनाए रखेंगे। निवेशक आक्रामक रूप से बॉन्ड खरीदने से हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि मुख्य मुद्रास्फीति (core inflation) और ऊर्जा संबंधी जोखिमों के कारण मौद्रिक नीति में जल्द किसी बड़ी नरमी की गुंजाइश नहीं है।
ईसीबी का आक्रामक रुख
ब्याज दरों को लेकर आशंकाओं को और पुख्ता करते हुए, ईसीबी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने एक स्पष्ट रूप से आक्रामक बयान दिया। उन्होंने कहा कि सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी आवश्यक बनी हुई है, भले ही यूरोजोन के आर्थिक परिदृश्य में सुधार के संकेत दिखें।
Adइन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि फ्रैंकफर्ट में नीति निर्माता अंतर्निहित मूल्य दबावों को नियंत्रित करने पर मजबूती से ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। इससे उन उम्मीदों पर पानी फिर गया है कि केंद्रीय बैंक शरद ऋतु तक नरम रुख अपना सकता है।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
यूरोजोन में उधारी लागत का ऊंचा बना रहना ब्लॉक की अर्थव्यवस्था के लिए एक संवेदनशील समय पर आया है, जिससे सार्वजनिक और निजी दोनों उधारकर्ताओं के लिए वित्तीय स्थितियां सख्त बनी हुई हैं।
- सरकारी खर्च: ऊंची सॉवरेन यील्ड यूरोजोन सरकारों के लिए ऋण-सेवा लागत (debt-servicing costs) को बढ़ा रही है।
- कॉर्पोरेट और उपभोक्ता: यह सीधे तौर पर पूरे क्षेत्र में कॉर्पोरेट ऋण और मॉर्गेज दरों को भी बढ़ा रहा है।
आने वाले दिनों में निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत घोषणाओं पर भी नजर रखेंगे, जिनसे वैश्विक ब्याज दरों की भविष्य की दिशा पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।