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रोजगार रिपोर्ट से पहले डॉलर स्थिर, फेड के नरम संकेतों से आक्रामक दांव कम हुए

अहम अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट जारी होने से पहले डॉलर शुक्रवार को कई महीनों के निचले स्तर के करीब स्थिर रहा। फेडरल रिजर्व के एक वरिष्ठ अधिकारी के नरम रुख वाले बयानों के बाद डॉलर इस सप्ताह एक उल्लेखनीय गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गई हैं।
फेड के नरम रुख से डॉलर पर दबाव
डॉलर में हालिया गिरावट का मुख्य कारण फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के बयानों में आया बदलाव है। वॉलर ने गुरुवार को कहा कि हाल के मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़े मुद्रास्फीति में उत्साहजनक कमी के संकेत दे रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर यह रुझान जारी रहता है, तो वह सितंबर की नीति बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में होंगे।
उनके विचार न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स की पिछली सतर्क टिप्पणियों से मेल खाते हैं। इन बयानों के बाद, वित्तीय वायदा बाजारों ने अपनी उम्मीदों को तेजी से समायोजित किया। इस महीने फेड द्वारा 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना इस सप्ताह की शुरुआत में 63% से घटकर लगभग 50% रह गई है।
प्रमुख मुद्राओं का प्रदर्शन
यूरो डॉलर के मुकाबले $1.1600 पर लगभग स्थिर रहा, लेकिन इस सप्ताह इसमें 0.3% की साप्ताहिक बढ़त होने की उम्मीद है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने यूरोपीय परिसंपत्तियों को समर्थन प्रदान किया है।
Adइस बीच, जापानी येन में कई दिनों की तेज बढ़त के बाद थोड़ी नरमी आई और यह 0.4% गिरकर 156.35 प्रति डॉलर पर आ गया। येन में पिछली तेज उछाल के बाद बाजार में यह अटकलें तेज हो गई थीं कि जापानी अधिकारियों ने मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया है। हालांकि, येन इस सप्ताह 2.3% की बढ़त दर्ज करने की राह पर है, जो जुलाई के अंत के बाद से इसका सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन होगा।
बाजार की नजर नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर
अब विदेशी मुद्रा बाजार का पूरा ध्यान शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी अगस्त नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट पर केंद्रित है। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के सितंबर के ब्याज दर निर्णय को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगस्त में लगभग 56,000 नई नौकरियां जुड़ी होंगी, जबकि जुलाई में 23,000 की अप्रत्याशित कमी आई थी। बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर रहने की उम्मीद है। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं, तो यह फेड द्वारा सितंबर में दरें बढ़ाने की संभावना को और कम कर देगा, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत, मजबूत आंकड़े आक्रामक मौद्रिक नीति की उम्मीदों को फिर से हवा दे सकते हैं, जिससे डॉलर में तेजी आ सकती है।