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मध्य पूर्व तनाव से एशियाई मुद्राएं दबाव में, डॉलर मजबूत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण मंगलवार को एशियाई मुद्राओं में सीमित दायरे में कारोबार हुआ, क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी इस क्षेत्र की तेल-आयातक अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव डाला, जिससे डॉलर एक सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया।
डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों का असर
Investing.com के अनुसार, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 100.99 पर कारोबार कर रहा था, जो 15 जुलाई के बाद का सबसे मजबूत स्तर है। यह मजबूती अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की चिंताओं के कारण आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा ईरानी ठिकानों पर लगातार नौवीं रात हमले करने की पुष्टि के बाद बाजार में सतर्कता का माहौल है।
इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा से ऊर्जा शिपमेंट में व्यवधान की आशंका बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप, कच्चे तेल की कीमतें लगभग छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, जो एशिया की तेल-आयातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऊंची ऊर्जा लागत व्यापार संतुलन को बिगाड़ती है, आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती है और विदेशी पूंजी प्रवाह को कम करती है।
प्रमुख एशियाई मुद्राओं का प्रदर्शन
अधिकांश एशियाई मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुईं। जापानी येन के मुकाबले डॉलर 162.51 पर लगभग स्थिर रहा, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण येन कई दशकों के निचले स्तर के पास बना हुआ है। चीन द्वारा बेंचमार्क ऋण दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले के बाद चीनी युआन में भी मामूली बदलाव देखा गया।
Adदक्षिण पूर्व एशियाई मुद्राओं पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का दबाव स्पष्ट रूप से दिखा:
- थाई बहत (USD/THB): 0.2% की गिरावट।
- भारतीय रुपया (USD/INR): 0.1% की गिरावट।
- इंडोनेशियाई रुपिया (USD/IDR): 0.3% की गिरावट।
- फिलीपीन पेसो (USD/PHP): 0.2% की गिरावट।
कुछ मुद्राओं में दिखी मजबूती, आगे क्या?
हालांकि, कुछ मुद्राओं ने इस प्रवृत्ति के विपरीत प्रदर्शन किया। दक्षिण कोरियाई वोन इस क्षेत्र की बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक रहा। सप्ताहांत में घोषित विदेशी मुद्रा उदारीकरण के उपायों से निवेशकों का सेंटिमेंट सकारात्मक बना हुआ है। वहीं, न्यूजीलैंड का डॉलर 0.5% चढ़ गया, क्योंकि दूसरी तिमाही में वार्षिक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 4.1% हो गई, जो बाजार के अनुमानों से अधिक थी। इससे केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
अब निवेशकों का ध्यान इस सप्ताह बैंक ऑफ इंडोनेशिया के नीतिगत फैसले, दक्षिण कोरिया के जीडीपी आंकड़ों और ऑस्ट्रेलिया के श्रम बाजार रिपोर्ट पर रहेगा। इसके अलावा, अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से ब्याज दरों पर भविष्य के संकेतों का इंतजार रहेगा, जो बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।