Story
अमेरिका-कनाडा व्यापार तनाव: DOJ ने कनाडाई सरकार के साथ सहयोग रोकने की WSJ रिपोर्ट का खंडन किया

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के एंटीट्रस्ट डिवीजन को कनाडा सरकार के साथ सभी तरह के सहयोग को रोकने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, न्याय विभाग ने इस खबर का जोरदार खंडन करते हुए इसे "गलत" करार दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार विवाद की गंभीरता और बढ़ गई है।
रिपोर्ट के दावे और DOJ का खंडन
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में ईमेल का हवाला देते हुए कहा कि एंटीट्रस्ट डिवीजन के अंतर्राष्ट्रीय सेक्शन की प्रमुख लिंडा मार्शल ने बुधवार को अधिकारियों को कनाडाई अधिकारियों के साथ मामलों पर सभी सहयोग और नीतिगत मुद्दों पर जुड़ाव रोकने का आदेश दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शुक्रवार को सेक्शन प्रमुखों से कनाडा के साथ सहयोग के क्षेत्रों का विवरण देने वाली सूची प्रदान करने के लिए कहा गया था।
इसके जवाब में, न्याय विभाग ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में इस रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से "गलत" बताया। विभाग ने कहा, "कथित निर्देश किसी को भी कभी नहीं दिया गया था।" DOJ ने स्पष्ट किया कि डिवीजन को केवल "एक विशिष्ट जांच पर एक निर्धारित बैठक को अस्थायी रूप से स्थगित करने" के लिए कहा गया था ताकि एंटीट्रस्ट टीम को तैयारी के लिए अधिक समय मिल सके।
बढ़ते व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम वाशिंगटन और ओटावा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच आया है, जो 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से तेज हो गया है। दोनों पड़ोसी देशों, जो दशकों से करीबी सहयोगी रहे हैं, ने एक-दूसरे के अरबों डॉलर के व्यापार पर टैरिफ लगाए हैं।
Adएंटीट्रस्ट मामलों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सीमा पार विलय, अधिग्रहण और प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं की जांच के लिए महत्वपूर्ण है। इस तरह के सहयोग में किसी भी तरह की रुकावट उन कंपनियों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकती है जो दोनों देशों में काम करती हैं।
बाज़ार के लिए इसका क्या मतलब है
हालांकि DOJ ने रिपोर्ट का खंडन किया है, लेकिन इस तरह की खबरें ही निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर सकती हैं। नियामक सहयोग का राजनीतिकरण सीमा पार व्यापार और निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सहयोग वास्तव में प्रभावित होता है, तो इससे विलय समीक्षाओं में देरी हो सकती है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुपालन लागत बढ़ सकती है। यह घटना दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंधों में आई खटास का एक और संकेत है, जिस पर निवेशक और कॉरपोरेट जगत करीब से नजर रखेंगे।