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मध्य पूर्व में आपूर्ति जोखिम बढ़ने से ब्रेंट $110 के करीब, तेल की कीमतों में उछाल

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Sep 11, 20262 min read
मध्य पूर्व में आपूर्ति जोखिम बढ़ने से ब्रेंट $110 के करीब, तेल की कीमतों में उछाल
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मध्य पूर्व में शिपिंग पर बढ़ते हमलों के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच शुक्रवार को तेल की कीमतों में और वृद्धि हुई, जिससे ब्रेंट क्रूड वायदा चार महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुँच गया। यह उछाल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा एक प्रमुख शिपिंग मार्ग पर नियंत्रण बढ़ाने के बाद आया है।

प्रमुख मूल्य गतिविधियाँ

Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड वायदा 0.6% बढ़कर $108.21 प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 0.55% चढ़कर $103.08 प्रति बैरल हो गया। दिन के कारोबार के दौरान, ब्रेंट $109.97 प्रति बैरल के उच्च स्तर पर भी पहुँचा, जो मई की शुरुआत के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है।

यह सप्ताह तेल बाज़ार के लिए बेहद मज़बूत रहा है:

  • ब्रेंट वायदा में साप्ताहिक 12.4% की बढ़त दर्ज की गई।
  • WTI वायदा इस सप्ताह 12.7% बढ़ा है।
  • यह जुलाई की शुरुआत के बाद से दोनों बेंचमार्क के लिए सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है।

आपूर्ति संबंधी चिंताएँ क्यों बढ़ीं

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कीमतों में यह तेज़ी मुख्य रूप से मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण है। ईरान ने कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला किया, जिसके जवाब में संयुक्त राज्य अमेरिका ने पांच ईरानी टैंकरों को डुबोने की बात कही। यह हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य कार्रवाइयों में से एक है।

इसके अतिरिक्त, यमन के ईरान समर्थित हूती समूह द्वारा मोचा बंदरगाह शहर पर नियंत्रण करने की रिपोर्टों ने चिंताएँ और बढ़ा दी हैं। इस कदम से बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य पर उनका प्रभाव बढ़ गया है, जो एक और महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग है। हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों और सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर हमले किए जाने की भी खबरें हैं।

बाज़ार पर प्रभाव

इन घटनाओं का सीधा असर बाज़ार की धारणा पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मन्देब, दोनों प्रमुख मार्गों पर व्यवधान के खतरे ने व्यापारियों को कच्चे तेल की कीमतों में एक बड़ा जोखिम प्रीमियम (risk premium) शामिल करने के लिए प्रेरित किया है। निवेशकों को डर है कि संघर्ष बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति में गंभीर कटौती हो सकती है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।

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