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कक्षीय होड़ तेज़: अमेज़ॅन और रॉकेट लैब की नज़रें FCC के वोट पर टिकीं

Summary
अमेज़ॅन और रॉकेट लैब जैसी कंपनियाँ निम्न-पृथ्वी कक्षा में उपग्रहों के लिए प्रमुख स्थान हासिल करने की दौड़ में हैं, क्योंकि 22 जुलाई को अमेरिकी FCC उपग्रह लाइसेंसिंग नियमों में बड़े बदलाव पर मतदान करने वाला है। यह फैसला स्पेसएक्स के स्टारलिंक के प्रभुत्व वाले बाज़ार के भविष्य को आकार दे सकता है।
अमेज़ॅन ने अपने लियो (Leo) उपग्रह समूह के 396 उपग्रहों को निम्न-पृथ्वी कक्षा में स्थापित कर प्रारंभिक ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की महत्वपूर्ण सीमा पार कर ली है। यह कदम इसे सीधे तौर पर स्पेसएक्स के स्टारलिंक के साथ प्रतिस्पर्धा में लाता है, जिसके पहले से ही 10,000 से अधिक उपग्रह हैं और बाज़ार में एक मज़बूत बढ़त हासिल है। यह होड़ सीमित कक्षीय स्लॉट और रेडियो-फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम के लिए है, जिन्हें हासिल करना किसी ज़मीन पर कब्ज़ा करने जैसा है।
इस प्रतिस्पर्धा में रॉकेट लैब ने भी एक बड़ा कदम उठाया है, जिसने कथित तौर पर इरिडियम कम्युनिकेशंस (Iridium Communications) को 8 बिलियन डॉलर में खरीदने की घोषणा की है। यह सौदा रॉकेट लैब की लॉन्च क्षमताओं को इरिडियम के मौजूदा 66-उपग्रह नेटवर्क के साथ जोड़ देगा। इसी बीच, अमेज़ॅन द्वारा भी छोटे ऑपरेटर ग्लोबस्टार (Globalstar) का अधिग्रहण करने की खबरें हैं, ताकि उसके मौजूदा कक्षीय स्पेक्ट्रम का लाभ उठाया जा सके।
इस पूरी दौड़ का भविष्य अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) के एक महत्वपूर्ण फैसले पर निर्भर करता है। FCC 22 जुलाई को अपने उपग्रह लाइसेंसिंग प्रक्रिया में बड़े बदलाव पर मतदान करने वाला है, जिसका उद्देश्य बढ़ती संख्या में आ रहे आवेदनों को तेजी से संसाधित करने के लिए एक "लाइसेंसिंग असेंबली लाइन" बनाना है। एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया नए प्रवेशकों को तेजी से विस्तार करने में मदद कर सकती है, जबकि मौजूदा बड़े ऑपरेटर अपने लाभ को बनाए रखने के लिए नियमों को प्रभावित कर सकते हैं।
Adयह प्रतिस्पर्धी दबाव सिर्फ अमेरिकी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि चीन भी मध्य पूर्व में अपनी अंतरिक्ष कूटनीति का तेजी से विस्तार कर रहा है, जो बाहरी अंतरिक्ष को नियंत्रित करने वाले नियमों को प्रभावित कर सकता है। इस क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता का असर शेयर बाज़ार पर भी दिखा, जहाँ मंगलवार को स्पेसएक्स और रॉकेट लैब सहित अंतरिक्ष क्षेत्र की कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।