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एयरबस ने LEIA प्रोजेक्ट के साथ हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक विमान प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाया

विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एयरबस ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका के भागीदारों के साथ मिलकर अपनी LEIA (लार्ज स्केल इंटीग्रेशन डिमॉन्स्ट्रेटर ऑफ हाइब्रिड इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर) परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य अगली पीढ़ी के वाणिज्यिक विमानों के लिए एक उन्नत हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक गैर-प्रणोदन ऊर्जा प्रणाली विकसित करना है।
परियोजना का उद्देश्य और दायरा
LEIA परियोजना को यूरोपीय संघ के 'क्लीन एविएशन जॉइंट अंडरटेकिंग' से समर्थन प्राप्त है। इसका मुख्य ध्यान छोटी से मध्यम दूरी के विमानों के लिए डिज़ाइन किए गए इलेक्ट्रिकल सिस्टम के लिए उच्च-वोल्टेज उत्पादन और वितरण पर है। यह परियोजना विमान के प्रणोदन (propulsion) के बजाय अन्य प्रणालियों को बिजली देने पर केंद्रित है।
एयरबस में 'एयरक्राफ्ट ऑफ टुमॉरो रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी' के प्रमुख करीम मोकाडेम ने कहा, "हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक प्रौद्योगिकियों के विकास में हमारी प्रगति और LEIA डिमॉन्स्ट्रेटर में हमारा कदम, भविष्य की उड़ान को डिजाइन करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।"
प्रौद्योगिकी और अगले कदम
यह परियोजना पहले के SWITCH प्रोजेक्ट की सफलता पर आधारित है, जो हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक पावरट्रेन सबसिस्टम पर केंद्रित था। कोलिन्स एयरोस्पेस ने जुलाई में SWITCH के लिए एकीकृत प्रयोगशाला परीक्षण पूरा कर लिया है, और अब इन सबसिस्टम को जर्मनी के ओटोब्रन में एयरबस की प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
एयरबस की टीमें इस सुविधा में विमान-स्तरीय एकीकरण परीक्षण करेंगी। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
Ad- स्केलेबल मोटर/जनरेटर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर का एकीकरण
- बिजली वितरण उपकरण और बैटरी इंटरफेसिंग
- ऊर्जा-प्रबंधन प्रणालियों का डिजाइन और परीक्षण
एयरबस की योजना इन प्रणालियों को कठोर परीक्षणों के माध्यम से सत्यापित करने की है, जिसका जमीनी प्रदर्शन 2027 के लिए निर्धारित है।
उद्योग के लिए महत्व
LEIA परियोजना विमानन उद्योग के डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल नए ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन ऊर्जा प्रणालियों के प्रबंधन के लिए आवश्यक नए इकोसिस्टम और आर्किटेक्चर को विकसित करने पर भी जोर देता है।
इस परियोजना में एयरबस के भागीदारों में AVL, कोलिन्स एयरोस्पेस, Safran, SAFT और द यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक जैसे प्रमुख अकादमिक और औद्योगिक संस्थान शामिल हैं। यह व्यापक सहयोग इस बात का संकेत है कि उद्योग स्थायी विमानन के भविष्य के लिए मिलकर काम कर रहा है।