Story
AI बूम का असर: डेटा सेंटर निर्माण से वर्क बूट्स की बिक्री में तेज उछाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग ने एक अप्रत्याशित क्षेत्र को बढ़ावा दिया है: वर्कवियर और सेफ्टी बूट्स। अमेरिकी रिटेलर बूट बार्न (Boot Barn) के अनुसार, डेटा सेंटर के निर्माण में आई तेजी के कारण उनके वर्क बूट्स के थोक ऑर्डर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जो दर्शाता है कि AI का प्रभाव सिलिकॉन वैली से कहीं आगे तक फैल रहा है।
डेटा सेंटरों से बढ़ी मांग
न्यूयॉर्क में गोल्डमैन सैक्स ग्लोबल कंज्यूमर एंड रिटेल कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, बूट बार्न के सीईओ जॉन हेज़न ने खुलासा किया कि कंपनी के बल्क वर्कवियर ऑर्डर का एक बड़ा हिस्सा अब डेटा सेंटर निर्माण परियोजनाओं से आ रहा है। कंपनी पारंपरिक रूप से तेल, गैस और निर्माण फर्मों को अपनी टीमों के लिए बूट्स की आपूर्ति करती रही है, लेकिन अब डेटा सेंटर एक प्रमुख ग्राहक के रूप में उभर रहे हैं।
हेज़न ने बताया कि कंपनी स्थानीय स्टोरों में स्टॉक का प्रबंधन करने के लिए पास के डेटा सेंटर परियोजनाओं की प्रगति पर नज़र रख रही है। उन्होंने कहा, "जब वे जमीन साफ कर रहे होते हैं, तो हमें सामान्य वर्क बूट्स की जरूरत होती है। जब वे चार दीवारें बना रहे होते हैं, तो हम स्टील-टो वर्क बूट्स पर ध्यान केंद्रित करते हैं।" बूट बार्न ने अपने वर्क बूट्स व्यवसाय में लगातार पिछली पांच तिमाहियों से तुलनीय बिक्री वृद्धि दर्ज की है।
व्यापक आर्थिक प्रभाव
Adयह ट्रेंड केवल बूट बार्न तक ही सीमित नहीं है। वर्कवियर निर्माता ब्रंट वर्कवियर (Brunt Workwear) ने भी रॉयटर्स को बताया कि उनकी सबसे मजबूत मांग कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों से आ रही है, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़े निवेश को आकर्षित कर रहे हैं। कंपनी के सीईओ एरिक गिरौर्ड के अनुसार, ब्रंट वर्कवियर डेटा सेंटर निर्माण से उत्पन्न मांग को पूरा करने के लिए "कड़ी मेहनत" कर रहा है।
यह घटनाक्रम AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के विशाल पैमाने को रेखांकित करता है। इसका असर श्रम बाजार पर भी दिख रहा है:
- अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, निर्माण क्षेत्र में अगस्त में 22,000 नई नौकरियां जोड़ी गईं।
- इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण डेटा सेंटर बनाने के लिए श्रमिकों की बढ़ती मांग है।
- निवेशकों के लिए, यह इस बात का संकेत है कि AI बूम का लाभ केवल चिप निर्माताओं और सॉफ्टवेयर कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई अन्य सहायक उद्योगों को भी फायदा हो रहा है।