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अमेरिकी नौसेना पर हमले के बाद अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों पर किया हमला: सेंटकॉम

Summary
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान द्वारा अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने शनिवार को तीन ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया। यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा दो अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के बाद की गई, जिससे क्षेत्र में पहले से जारी संघर्ष और गहरा गया है।
जवाबी कार्रवाई और बयान
सेंटकॉम के अनुसार, यह हमला IRGC की कार्रवाई का सीधा जवाब था। सेंटकॉम के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, "IRGC को यह संदेश स्पष्ट होना चाहिए: यदि आप हमारे दो जहाजों पर गोलीबारी करते हैं, तो हम आपके तीन जहाजों को निशाना बनाकर और भी बड़ी आर्थिक कीमत वसूलेंगे।" हमलों में से एक ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप के तट के पास हुआ।
- अमेरिकी सेंटकॉम ने कहा कि हमले में कोई भी अमेरिकी कर्मी घायल नहीं हुआ।
- ईरान की अर्ध-आधिकारिक समाचार एजेंसी तस्नीम ने बताया कि खार्ग के लंगरगाह क्षेत्र में एक टैंकर पर चार अमेरिकी मिसाइलों से हमला हुआ।
- तस्नीम ने स्थानीय स्रोतों का हवाला देते हुए कहा कि कोई हताहत नहीं हुआ और टैंकर के चालक दल को निकाला जा रहा है।
बाजार पर असर और व्यापक संदर्भ
Adइस सैन्य तनाव के बढ़ने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा $96.28 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 24 जुलाई के बाद का उच्चतम स्तर है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
यह घटना उस संघर्ष की नवीनतम कड़ी है जो फरवरी में ईरान पर अमेरिकी हमलों के साथ शुरू हुआ था। इस संघर्ष ने पहले ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर दिया है। यह घटनाक्रम अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी के बाद हुआ है, जो ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के जवाब में की गई थी। युद्ध से पहले, दुनिया की तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता था।
खार्ग द्वीप का रणनीतिक महत्व
खार्ग द्वीप ईरान के तेल उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। युद्ध से पहले, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के तीसरे सबसे बड़े उत्पादक ईरान के 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के माध्यम से होता था। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण पहले से ही संकट में चल रही ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल उद्योग पर किसी भी हमले का और अधिक दबाव पड़ेगा।