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ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड $90 के पार, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा

Summary
अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल हमलों के जवाब में दर्जनों ईरानी ठिकानों पर हमला किया, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया और तेल की कीमतों में 8% से अधिक की तेजी आई।
अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दर्जनों ठिकानों पर जवाबी हमला किया है, जिसके बाद मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है। यह कार्रवाई तेहरान द्वारा इस क्षेत्र में अमेरिकी सेनाओं पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद की गई।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विवरण
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, गुरुवार को दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में सैन्य कमांड सेंटर और ड्रोन सुविधाओं सहित कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने एक बयान में कहा, "इन हमलों का उद्देश्य ईरान और उसके प्रॉक्सी समूहों द्वारा अमेरिकी सेनाओं, वाणिज्यिक शिपिंग और पड़ोसी खाड़ी देशों के लिए उत्पन्न खतरों को और कम करना था।"
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि केशम द्वीप पर अमेरिकी हमलों में तीन लोग मारे गए। यह सैन्य टकराव इस क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष का नवीनतम उदाहरण है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है।
बाजार पर असर और तेल की कीमतें
इस भू-राजनीतिक तनाव के बढ़ने का सीधा असर कमोडिटी बाजारों पर पड़ा। बुधवार को तेल की कीमतों में पांच महीने के युद्ध के दौरान सबसे तेज उछालों में से एक देखा गया।
Ad- ब्रेंट क्रूड वायदा 8% से अधिक बढ़कर $90 प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
- यह वृद्धि इस सप्ताह की शुरुआत में आई गिरावट के उलट थी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, संघर्ष का केंद्र बिंदु बना हुआ है, जिससे आपूर्ति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष
यह संघर्ष अब मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी फैलता दिख रहा है। अमेरिकी हमलों से पहले, अमेरिका और सऊदी अरब ने पूर्वी इराक में ईरान-समर्थित समूहों के खिलाफ संयुक्त हमले किए थे। इसके अलावा, मिस्र में एक अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर पर ड्रोन से हमला होने की भी खबर है, हालांकि इसकी जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक इस क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशक और बाजार इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि किसी भी तरह की और सैन्य वृद्धि का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।