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अमेरिका के 'आर्थिक डी-डे' की तैयारी, ईरान ने खाड़ी से तेल निर्यात रोकने की चेतावनी दी

Summary
अमेरिका ईरान और उसके व्यापारिक भागीदारों पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके जवाब में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तनाव बढ़ गया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है, जिसे उसने "अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला" बताया है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर "आर्थिक युद्ध" जारी रहा तो वह खाड़ी क्षेत्र से होने वाले सभी तेल निर्यातों को रोक देगा, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका के नए प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को नए प्रतिबंधों की घोषणा करने वाले हैं, जिनका लक्ष्य ईरान के व्यापारिक भागीदारों को निशाना बनाना है। फाइनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में, बेसेंट ने लिखा कि यह "एक आर्थिक डी-डे" होगा और इसे "एक विरोधी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला" बताया।
ब्योरा दिए बिना, बेसेंट ने संकेत दिया कि अमेरिका उन देशों को भी लक्षित करेगा जो ईरान की अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली के साथ जुड़कर "तुष्टिकरण" की नीति अपना रहे हैं। यह कदम छह महीने से चल रहे संघर्ष का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुँचाया है।
ईरान की जवाबी धमकी और बाजार पर असर
इन प्रतिबंधों की तैयारी के बीच, ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ई ने सोशल मीडिया पर कहा, "अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी में कहीं से भी तेल की एक भी बूंद का निर्यात नहीं किया जाएगा।"
Adयह धमकी वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्गों में से एक है। इस मार्ग के बंद होने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर भारी दबाव पड़ सकता है और आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है। चीन, जो अपनी तेल जरूरतों का आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है, ने कहा है कि "प्रतिबंध और दबाव से समस्या का समाधान नहीं होता" और कूटनीति का आह्वान किया है।
मौजूदा संघर्ष की पृष्ठभूमि
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, उच्च मुद्रास्फीति और कमजोर मुद्रा के कारण दबाव में है। अमेरिकी और इज़राइली हमलों ने देश के बुनियादी ढांचे को और नुकसान पहुँचाया है।
इस बीच, कतर, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सोमवार को तेहरान का दौरा करने वाले हैं, जिसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा बहाल करने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।