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अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध के खिलाफ चेतावनी दी, गैस की कीमतों पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए।

Summary
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध अप्रभावी होगा और घरेलू रिफाइनरियों को उत्पादन में कटौती करने के लिए मजबूर करके अनजाने में गैसोलीन और जेट ईंधन की कीमतों में वृद्धि कर सकता है।
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बुधवार को डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के विचार का कड़ा विरोध किया और चेतावनी दी कि यह कदम उल्टा पड़ सकता है और अन्य ईंधनों की कीमतों में वृद्धि का कारण बन सकता है। रॉयटर्स द्वारा प्रकाशित इन टिप्पणियों से सचिव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से असहमत नज़र आते हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड तोड़ डीजल कीमतों के बीच एक दिन पहले ही इस विचार का समर्थन किया था।
सचिव ने अनपेक्षित परिणामों की चेतावनी दी
न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, राइट ने तर्क दिया कि निर्यात प्रतिबंध एक "बेकार उपाय" है जो "बिल्कुल भी कारगर नहीं है"। उन्होंने घरेलू ऊर्जा बाजार पर संभावित नकारात्मक प्रभावों का विस्तार से वर्णन किया।
सचिव के अनुसार, यदि अमेरिकी रिफाइनरियां अपने डीजल उत्पादन का निर्यात करने में असमर्थ होती हैं, तो उनकी भंडारण क्षमता जल्दी ही समाप्त हो जाएगी। इस रसद संबंधी बाधा के कारण उन्हें समग्र शोधन कार्यों को कम करना पड़ेगा।
राइट ने समझाया, "यदि आप हमारी रिफाइनरियों से निकलने वाले डीजल का निर्यात नहीं कर सकते... तो आपको अमेरिकी शोधन को कम करना होगा, जिससे गैसोलीन और जेट ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।"
Adसंदर्भ: बाज़ार के दबाव के बीच नीतिगत मतभेद
डीज़ल के निर्यात पर संभावित प्रतिबंध को लेकर बहस ऐसे समय में शुरू हुई है जब अमेरिका और यूरोप दोनों में डीज़ल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। स्रोत सामग्री के अनुसार, कीमतों में यह उछाल ईरान और यूक्रेन में चल रहे युद्धों के कारण हुआ है, जिससे वैश्विक स्तर पर डिस्टिलेट की आपूर्ति सीमित हो गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को घरेलू ईंधन लागत को कम करने के संभावित उपाय के रूप में प्रतिबंध के विचार का समर्थन किया था। सचिव राइट के सार्वजनिक विरोध से प्रशासन के भीतर नीतिगत मतभेद स्पष्ट होता है और यह संकेत मिलता है कि ऐसे उपाय को लागू करने में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं। ऊर्जा बाज़ारों के लिए, सचिव का रुख यह स्पष्ट करता है कि डिस्टिलेट निर्यात पर प्रतिबंध लगाना ऊर्जा विभाग की पसंदीदा नीति नहीं है।