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अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में गिरावट, लेकिन ईंधन स्टॉक में अप्रत्याशित वृद्धि

Summary
ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में कमी आई, लेकिन यह विश्लेषकों के अनुमान से कम थी। वहीं, गैसोलीन और डिस्टिलेट स्टॉक में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि दर्ज की गई, जो कमजोर मांग का संकेत दे सकता है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 11 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में देश के कच्चे तेल के भंडार में गिरावट आई है। हालांकि, इसी अवधि में गैसोलीन और डिस्टिलेट जैसे ईंधन उत्पादों के स्टॉक में अप्रत्याशित वृद्धि हुई, जो बाजार की उम्मीदों के विपरीत है।
EIA रिपोर्ट के मुख्य आँकड़े
EIA की साप्ताहिक रिपोर्ट में कच्चे तेल और ईंधन उत्पादों के स्टॉक में मिश्रित तस्वीर सामने आई है। बाजार विश्लेषकों के अनुमानों की तुलना में वास्तविक आंकड़े काफी अलग थे, जिससे ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
- कच्चे तेल का भंडार: 6,40,000 बैरल घटकर 42.34 करोड़ बैरल पर आ गया। विश्लेषकों ने 16 लाख बैरल की बड़ी गिरावट का अनुमान लगाया था।
- कुशिंग, ओक्लाहोमा हब: इस प्रमुख डिलीवरी पॉइंट पर स्टॉक में 3,42,000 बैरल की कमी आई।
- गैसोलीन का भंडार: इसमें 7,94,000 बैरल की वृद्धि होकर यह 20.77 करोड़ बैरल हो गया, जबकि विश्लेषकों को 10 लाख बैरल की गिरावट की उम्मीद थी।
- डिस्टिलेट भंडार: डीजल और हीटिंग ऑयल सहित इस श्रेणी में स्टॉक 16 लाख बैरल बढ़कर 10.79 करोड़ बैरल पर पहुंच गया। यह 71,000 बैरल की मामूली वृद्धि के अनुमान से कहीं अधिक है।
रिफाइनरी गतिविधियाँ और आयात
Adरिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनरी गतिविधियों में भी कमी देखी गई, जो ईंधन की मांग में संभावित नरमी का एक और संकेत है।
रिफाइनरियों ने पिछले सप्ताह की तुलना में प्रति दिन 2,56,000 बैरल कम कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया। इसके परिणामस्वरूप, रिफाइनरी उपयोगिता दर 1 प्रतिशत घटकर 96.8% रह गई। वहीं, अमेरिका में शुद्ध कच्चे तेल का आयात सप्ताह के दौरान प्रति दिन 11.8 लाख बैरल कम हुआ।
बाजार के लिए क्या हैं मायने
यह डेटा तेल बाजार के लिए मिश्रित संकेत देता है। कच्चे तेल के भंडार में गिरावट आमतौर पर कीमतों के लिए एक सकारात्मक कारक होती है, लेकिन यह गिरावट उम्मीद से बहुत कम है। दूसरी ओर, गैसोलीन और डिस्टिलेट स्टॉक में अप्रत्याशित वृद्धि यह दर्शाती है कि उपभोक्ता और औद्योगिक मांग उम्मीद से कमजोर हो सकती है। यह विरोधाभासी डेटा आने वाले कारोबारी सत्रों में तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर सकता है, क्योंकि निवेशक मांग और आपूर्ति के इन संकेतों का आकलन करेंगे।