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लगातार 12वीं रात ईरान पर अमेरिकी हमले, मध्य पूर्व में तनाव से तेल की कीमतों में उछाल

Summary
अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात ईरान पर हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल बाजारों में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
अमेरिकी सेना ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर ईरान के खिलाफ लगातार 12वीं रात सैन्य हमले किए हैं। इन कार्रवाइयों ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है।
हमलों का विवरण और लक्ष्य
अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, इन हमलों में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। लक्षित संपत्तियों में शामिल हैं:
- समुद्री क्षमताएं
- मिसाइल और ड्रोन भंडारण सुविधाएं
- तटीय निगरानी स्थल
- वायु रक्षा प्रणालियाँ
बयान में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने जुलाई के महीने में ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों पर हमला किया है और समुद्र में ईरान के खिलाफ नाकाबंदी फिर से शुरू कर दी है। नवीनतम अमेरिकी हमले पांच घंटे तक चले। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों वाले खाड़ी देशों पर जवाबी कार्रवाई की थी।
बाजार पर असर और बढ़ता तनाव
Adइस सैन्य वृद्धि का सीधा असर वैश्विक तेल बाजारों पर दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो एक प्रमुख वैश्विक तेल पारगमन मार्ग है, में व्यवधान की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
- ब्रेंट क्रूड वायदा (Brent Oil Futures) 2.25% बढ़कर $96.19 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
- वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा (Crude Oil WTI Futures) 1.80% चढ़कर $88.39 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर गोली चलाता है, तो अमेरिका हर बार एक ईरानी पुल या पावर प्लांट को नष्ट कर देगा। इसके जवाब में, ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी कार्रवाई के जवाब में क्षेत्रीय तेल, गैस और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जोखिम और बढ़ गया है।
अंतर्राष्ट्रीय कानून और चिंताएं
नागरिकों के लिए आवश्यक समझे जाने वाले बुनियादी ढांचों पर हमले को लेकर अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं बढ़ रही हैं। 1949 के जिनेवा कन्वेंशन युद्ध में मानवीय आचरण को नियंत्रित करते हैं और ऐसे हमलों पर रोक लगाते हैं। अप्रैल में, संयुक्त राज्य अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि इस तरह के हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। हाल के दिनों में इस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है।