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डॉलर की बढ़ती मांग से युगांडा शिलिंग पर दबाव, रिकॉर्ड निचले स्तर का खतरा

Summary
ईरान में चल रहे संघर्ष और स्थानीय फर्मों द्वारा डॉलर की मजबूत मांग के कारण युगांडा की मुद्रा शिलिंग पर भारी दबाव है, जिससे यह अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर के करीब पहुंच गई है।
स्थानीय कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र की फर्मों द्वारा डॉलर की मांग बढ़ने के कारण युगांडा शिलिंग पर आने वाले सप्ताह में दबाव बने रहने की उम्मीद है। गुरुवार को वाणिज्यिक बैंकों ने शिलिंग को डॉलर के मुकाबले 3,925/3,935 पर कोट किया, जो पिछले गुरुवार के 3,860/3,870 के बंद भाव से काफी कमजोर है।
दबाव के प्रमुख कारण
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कमजोरी के पीछे दो मुख्य कारक हैं। पहला, ईरान में चल रहे संघर्ष की अवधि को लेकर अनिश्चितता है। इसके चलते कुछ बाजार प्रतिभागी भविष्य की विनिमय दरों को सुरक्षित करने के लिए डॉलर की फॉरवर्ड खरीद कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंक के अनुसंधान और नीति के कार्यकारी निदेशक, एडम मुगुमे के अनुसार, विनिर्माताओं और ऊर्जा-क्षेत्र की फर्मों की ओर से डॉलर की लगातार मजबूत मांग बनी हुई है, जो शिलिंग पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
Adबाजार का अनुमान
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट जारी रह सकती है। एक ट्रेडर ने कहा कि आने वाले दिनों में शिलिंग डॉलर के मुकाबले 4,000 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले इसका अब तक का सबसे कमजोर स्तर होगा।
क्षेत्रीय संदर्भ में, व्यापारियों का अनुमान है कि घाना और जाम्बिया की मुद्राएं भी आने वाले सप्ताह में दबाव में रहेंगी। वहीं, नाइजीरिया और केन्या की मुद्राओं के काफी हद तक स्थिर रहने का अनुमान है।