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तकनीकी शेयरों में तेजी से एशियाई बाजारों में उछाल, KOSPI 5% चढ़ा

Summary
वॉल स्ट्रीट में आई रिकवरी के बाद बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में तकनीकी शेयरों की अगुवाई में तेजी देखी गई, जिसमें दक्षिण कोरिया का KOSPI सूचकांक 5% से अधिक उछल गया।
वॉल स्ट्रीट में आई रिकवरी के बाद बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में वृद्धि को नजरअंदाज करते हुए तकनीकी शेयरों में खरीदारी पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे क्षेत्रीय बाजारों को मजबूती मिली।
तकनीकी शेयरों की अगुवाई में बाजार में तेजी
एशियाई बाजारों में यह बढ़त अमेरिकी बाजारों में रातोंरात हुए सुधार के अनुरूप थी। वॉल स्ट्रीट पर, S&P 500 में 0.9% की वृद्धि हुई, जबकि तकनीकी-केंद्रित NASDAQ कंपोजिट 1.3% और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.7% बढ़ा।
Nvidia (NASDAQ:NVDA) और Micron Technology (NASDAQ:MU) जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े चिप निर्माताओं के शेयरों में आई तेजी ने बाजार की धारणा को बढ़ावा दिया। अब निवेशकों की नजर बुधवार को आने वाले अल्फाबेट (NASDAQ:GOOGL) और टेस्ला (NASDAQ:TSLA) के तिमाही नतीजों पर है।
दक्षिण कोरिया और जापान के बाजारों में जोरदार उछाल
दक्षिण कोरिया के KOSPI सूचकांक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5% से अधिक की छलांग लगाई। इस तेजी का नेतृत्व चिप निर्माता कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (KS:005930) और एसके हाइनिक्स (KS:000660) ने किया।
Adजापान का निक्केई 225 सूचकांक भी लगभग 2% चढ़ गया, जबकि टॉपिक्स सूचकांक में 1.3% की वृद्धि हुई। बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जापान का निर्यात जून में सालाना आधार पर 19.3% बढ़ा, जो AI-संबंधित सेमीकंडक्टर उपकरणों की मांग और कमजोर येन से प्रेरित था। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण आयात 25.4% बढ़ने से जापान को 406.9 बिलियन येन का व्यापार घाटा हुआ।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार का दृष्टिकोण
बाजार की इस तेजी के बावजूद, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक जोखिम बना हुआ है। यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद ब्रेंट क्रूड वायदा $91 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया।
विश्लेषकों ने आगाह किया है कि हालांकि निवेशक फिलहाल तकनीकी शेयरों की रिकवरी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन तेल की कीमतों में लगातार मजबूती मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को फिर से बढ़ा सकती है। यह स्थिति दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण को जटिल बना सकती है।