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स्नैप ने 'नशे की लत' वाले मुकदमे में समझौता किया, मेटा अब अकेले करेगी मुकदमे का सामना

Summary
स्नैप इंक ने नाबालिगों में सोशल मीडिया की लत से जुड़े एक मुकदमे में अस्थायी समझौता कर लिया है। इस समझौते के बाद, मेटा प्लेटफॉर्म्स अब अगले हफ्ते लॉस एंजिल्स में शुरू होने वाले मुकदमे का सामना करने वाली अकेली प्रतिवादी कंपनी रह गई है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्नैप इंक (Snap Inc.) ने नाबालिगों पर अपने प्लेटफॉर्म को व्यसनी बनाने के दावों से जुड़े एक मुकदमे में अस्थायी समझौता कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (Meta Platforms Inc.) अब अगले सप्ताह लॉस एंजिल्स में शुरू होने वाले जूरी ट्रायल का सामना करने वाली एकमात्र प्रतिवादी कंपनी बन गई है।
समझौते का विवरण
यह समझौता स्नैप और "आर.के.सी." के रूप में पहचाने गए वादी के बीच हुआ है। कंपनी ने इस अस्थायी समझौते की पुष्टि की है, लेकिन इसकी वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया गया है।
इस मामले में पहले, गूगल के यूट्यूब (YouTube) और टिकटॉक (TikTok) भी उसी वादी के साथ समझौता कर चुके हैं। ये चारों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं या उनके परिवारों द्वारा दायर किए गए 3,000 से अधिक व्यक्तिगत शिकायतों का सामना कर रहे हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि उनके उत्पाद व्यसनी हैं और नुकसान पहुंचाते हैं।
मेटा और निवेशकों पर प्रभाव
Adस्नैप के इस समझौते से कंपनी के लिए एक कानूनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है, लेकिन अब सारा ध्यान मेटा पर केंद्रित हो गया है। निवेशक अब लॉस एंजिल्स में होने वाले मुकदमे के नतीजों पर करीब से नजर रखेंगे, क्योंकि इसका मेटा की वित्तीय देनदारियों और प्रतिष्ठा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फरवरी में कैलिफोर्निया की एक राज्य अदालत में इसी तरह का पहला मुकदमा चला था। उस मामले में, एक जूरी ने एक 20 वर्षीय महिला के मानसिक स्वास्थ्य संघर्षों के लिए मेटा और गूगल को उत्तरदायी पाया था और उसे कुल $6 मिलियन का हर्जाना देने का आदेश दिया था। यह पिछला फैसला मेटा के लिए आगामी मुकदमे में एक महत्वपूर्ण जोखिम का संकेत देता है।
आगामी कानूनी लड़ाई
इस समझौते के साथ, स्नैप, गूगल और टिकटॉक इस विशेष मामले से बाहर हो गए हैं, जिससे मेटा को अगले सप्ताह शुरू होने वाले मुकदमे में अकेले ही अपना बचाव करना होगा। यह मुकदमा सोशल मीडिया कंपनियों पर उनके प्लेटफॉर्म के कथित हानिकारक प्रभावों को लेकर बढ़ते कानूनी दबाव को उजागर करता है।