Story
फेड की सख्ती और तेल की कीमतों में उछाल से डॉलर मजबूत, पाउंड में गिरावट

Summary
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीदों और ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ी सुरक्षित निवेश की मांग के कारण डॉलर में मजबूती आई, जिससे ब्रिटिश पाउंड और यूरो पर दबाव देखा गया।
बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी बैठक के मिनट्स से पहले सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को प्राथमिकता दी। तेल की कीमतों में उछाल ने भी डॉलर की इस मजबूती में योगदान दिया।
डॉलर की मजबूती के प्रमुख कारण
डॉलर में आई यह तेजी कई कारकों का परिणाम है। ईरान पर नए अमेरिकी हमलों और शेयर बाजारों में घबराहट के माहौल ने निवेशकों को डॉलर जैसी सुरक्षित मुद्राओं की ओर धकेला है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 6% की बढ़ोतरी होकर $79 प्रति बैरल के पास पहुंच जाने से भी डॉलर को समर्थन मिला।
आईएनजी (ING) के एफएक्स रणनीतिकार फ्रांसेस्को पेसोले के अनुसार, "शेयर बाजार की घबराहट ने डॉलर को कुछ समर्थन दिया - जो ग्रीनबैक की बहुत मजबूत सुरक्षित-निवेश अपील की याद दिलाता है।" निवेशक अब फेडरल रिजर्व की जून की बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं, जिससे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेत मिलने की उम्मीद है।
स्टर्लिंग और यूरो पर असर
डॉलर में मजबूती के कारण अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव देखा गया।
Ad- पाउंड स्टर्लिंग (GBP/USD): 0.07% गिरकर $1.3343 पर आ गया।
- यूरो (EUR/USD): 0.08% फिसलकर $1.1403 पर पहुंच गया।
हालांकि, हाल के दिनों में स्टर्लिंग को बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों से कुछ सहारा मिला है। तेल की कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण बाजार अब साल के अंत तक 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की पूरी तरह से उम्मीद कर रहा है।
बाजार का नजरिया और आगे की राह
बाजार का ध्यान अब फेडरल रिजर्व के मिनट्स पर केंद्रित है। आईएनजी (ING) को उम्मीद है कि ये मिनट्स फेड के आक्रामक संदेश की पुष्टि करेंगे और डॉलर की गति को मजबूत करेंगे। पेसोले का मानना है कि डॉलर इंडेक्स निकट भविष्य में 101.50-102.0 के स्तर तक जा सकता है।
डॉलर में नरमी के लिए अमेरिका से उम्मीद से कमजोर आर्थिक आंकड़ों या फेड मिनट्स में किसी अप्रत्याशित नरम रुख की आवश्यकता होगी, जिसकी संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।