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मध्य पूर्व तनाव के बीच तेल की कीमतों में गिरावट, लेकिन साप्ताहिक बढ़त की ओर अग्रसर

Summary
एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण यह लगातार तीसरे सप्ताह मजबूत बढ़त दर्ज करने की राह पर है।
एशियाई कारोबार में शुक्रवार को तेल की कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति में बाधाओं के कारण कच्चे तेल का बाजार लगातार तीसरे सप्ताह बड़ी बढ़त हासिल करने की ओर अग्रसर है। लाल सागर में टैंकरों पर हमलों के बाद भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने से आपूर्ति की चिंताएं बढ़ गई हैं।
संघर्ष और आपूर्ति की चिंताएं
इस सप्ताह कीमतों में उछाल का मुख्य कारण यमन के ईरान समर्थित हूती समूह द्वारा लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर किया गया हमला है। यह घटनाक्रम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में हुआ, जिसका उपयोग सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों से बचने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में कर रहा था।
Investing.com की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों के जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान और हूती समूह के खिलाफ "बड़ी सैन्य कार्रवाई" की चेतावनी दी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि ईरान ने अमेरिका समर्थित संघर्ष विराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।
बाजार के आंकड़े और प्रभाव
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, एशियाई कारोबार में कीमतें थोड़ी नरम हुईं:
Ad- ब्रेंट क्रूड वायदा 0.6% गिरकर $100.09 प्रति बैरल पर आ गया।
- वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 0.6% फिसलकर $91.62 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
इस मामूली गिरावट के बावजूद, ब्रेंट इस सप्ताह 14% की बढ़त के साथ दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो तेज बढ़त का लगातार तीसरा सप्ताह है। यह घटनाक्रम वैश्विक तेल भंडार में कमी आने के संकेतों के बीच आया है, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि मध्य पूर्व में बिगड़ते संघर्ष के कारण आपूर्ति में जल्द सुधार की उम्मीद कम है।
आर्थिक निहितार्थ
तेल की कीमतों में यह उछाल ऊर्जा-जनित स्थायी मुद्रास्फीति (energy-fueled inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो यह दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों पर अधिक आक्रामक (hawkish) रुख अपनाने के लिए मजबूर कर सकता है, जिसका असर वैश्विक आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।