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अमेरिकी चिप प्रतिबंधों के बावजूद मूनशॉट एआई बड़े मॉडल की योजना बना रहा है: रिपोर्ट

Summary
चीन की स्टार्टअप कंपनी मूनशॉट एआई कथित तौर पर अपने मौजूदा Kimi K3 मॉडल से भी बड़ा एक नया एआई मॉडल, Kimi K4, विकसित करने की योजना बना रही है। इस योजना के लिए उसे और अधिक उन्नत एनविडिया चिप्स की आवश्यकता होगी, जो अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों के अधीन हैं।
चीन स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप मूनशॉट एआई, अमेरिकी चिप प्रतिबंधों के बावजूद एक बड़े एआई मॉडल के विकास की योजना बना रहा है। द इन्फॉर्मेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी Kimi K4 नामक एक नए मॉडल को विकसित करने पर विचार कर रही है, जिसके लिए उसे और अधिक उन्नत एनविडिया (Nvidia) चिप्स की आवश्यकता होगी।
विस्तार की योजना और चिप्स की चुनौती
रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बीजिंग स्थित यह स्टार्टअप अपने मौजूदा Kimi K3 संस्करण से भी बड़े मॉडल पर काम करने के लिए चर्चा कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए, कंपनी को एनविडिया के अत्याधुनिक एआई चिप्स, विशेष रूप से ब्लैकवेल (Blackwell) संस्करणों तक अतिरिक्त पहुंच की आवश्यकता होगी।
यह स्थिति एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करती है, क्योंकि अमेरिकी नियमों के तहत ऐसी उन्नत तकनीक को चीनी कंपनियों तक पहुंचने से प्रतिबंधित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मूनशॉट अब K4 जैसे भविष्य के मॉडलों के विकास की तैयारी के लिए और अधिक ब्लैकवेल चिप्स हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
AdKimi K3 मॉडल का प्रशिक्षण
मूनशॉट एआई ने अपने मौजूदा मॉडल, Kimi K3, को भी एनविडिया के चिप्स का उपयोग करके प्रशिक्षित किया था, जिसमें सबसे उन्नत ब्लैकवेल संस्करण भी शामिल थे। Kimi K3 को 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर के साथ दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-सोर्स मॉडल बताया जाता है।
इस मॉडल के प्रशिक्षण स्थान को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी, माइकल क्रेटसियोस के एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, मूनशॉट ने K3 को थाईलैंड के एक डेटा सेंटर में प्रशिक्षित किया था, जहाँ अमेरिकी नियमों के तहत चीनी कंपनियों को एनविडिया चिप्स तक पहुंच की अनुमति हो सकती है। हालांकि, एक सूत्र ने बताया कि कंपनी ने K3 को आंशिक रूप से चीन में ही प्रशिक्षित किया था, क्योंकि चीन के सीमा-पार डेटा ट्रांसफर कानून प्री-ट्रेनिंग के लिए आवश्यक बड़ी मात्रा में डेटा को विदेशी डेटा सेंटरों में ले जाना मुश्किल बनाते हैं।