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लेबनान और इज़राइल के बीच अगली वार्ता 4 अगस्त को इटली में होगी: लेबनानी अधिकारी

Summary
लेबनान और इज़राइल के बीच अमेरिकी मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता का अगला दौर 4 अगस्त को इटली में निर्धारित है। इस बैठक का उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सैनिकों की वापसी की योजना को लागू करना है, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है।
एक लेबनानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि लेबनान और इज़राइल के बीच अमेरिकी मध्यस्थता वाली वार्ता का अगला दौर 4 अगस्त को इटली में आयोजित किया जाएगा। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सैनिकों की वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती की योजना को लागू करने पर केंद्रित है, जो दोनों देशों के बीच स्थायी शत्रुता को समाप्त करने का एक प्रयास है।
वार्ता का एजेंडा और पृष्ठभूमि
तीन महीने से अधिक समय तक चली आमने-सामने की बातचीत के बाद, दोनों पक्षों ने पिछले महीने एक रूपरेखा समझौते पर सहमति व्यक्त की थी। यह वार्ता उन देशों के लिए असामान्य है जो दशकों से औपचारिक रूप से युद्ध की स्थिति में हैं और उनके बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं।
इस समझौते के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:
- हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण
- दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सैनिकों की चरणबद्ध वापसी
- क्षेत्र में लेबनानी सैनिकों की तैनाती
तकनीकी विवरणों पर चर्चा के लिए राजदूत-स्तरीय वार्ता को अब इतालवी राजधानी में स्थानांतरित कर दिया गया है। यहां प्रतिनिधिमंडल "पायलट ज़ोन" कहे जाने वाले भौगोलिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जहां यह चरणबद्ध प्रक्रिया लागू की जाएगी।
ज़मीनी चुनौतियाँ और प्रमुख मुद्दे
Adइस सप्ताह पायलट ज़ोन कार्यक्रम के तहत पहली इज़राइली वापसी हुई, जहाँ इज़राइली सेना ने ज़ौतार अल-ग़रबियेह शहर छोड़ दिया और लेबनानी सेना ने वहां तैनाती शुरू कर दी। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने शहर का दौरा किया और कहा कि यह एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, लेकिन लेबनान सभी लेबनानी क्षेत्रों से इज़राइल की पूर्ण वापसी चाहता है।
हालांकि, इज़राइल का कहना है कि वह सीमा पर लगभग 10 किलोमीटर के बफर ज़ोन पर कब्जा बनाए रखेगा ताकि उत्तरी इज़राइली समुदायों को हिज़्बुल्लाह के हमलों से बचाया जा सके। इज़राइली अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक हिज़्बुल्लाह सशस्त्र रहेगा, वे दक्षिणी लेबनान में बने रहेंगे। वहीं, हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल के साथ सीधी बातचीत को खारिज कर दिया है और पूर्ण निरस्त्रीकरण से इनकार किया है।
राजनयिक प्रयास और बाज़ार पर असर
इस गतिरोध को दूर करने के लिए राजनयिक प्रयास भी जारी हैं। वाशिंगटन की अपनी यात्रा के दौरान, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि लेबनान से इज़राइल की पूर्ण वापसी "उस मूल कारण को खत्म कर सकती है जिसका हिज़्बुल्लाह लंबे समय से अपने औचित्य के रूप में हवाला देता रहा है।" उनके अनुसार, इसके बाद ही हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण संभव हो सकता है।
निवेशकों के लिए, यह वार्ता क्षेत्रीय स्थिरता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। इन वार्ताओं में प्रगति भू-राजनीतिक जोखिम को कम कर सकती है, जिससे बाज़ार की धारणा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके विपरीत, वार्ता की विफलता से तनाव बढ़ सकता है, जिससे वित्तीय बाज़ारों में अस्थिरता आ सकती है।