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ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने पिता की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा

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Jul 12, 20262 min read
ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने पिता की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा
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ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्ववर्ती अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया है। सरकारी टेलीविजन पर पढ़े गए एक बयान में, उन्होंने इस प्रतिशोध को "राष्ट्र की मांग" बताया और कहा कि यह "निश्चित रूप से" होकर रहेगा।

बयान का विवरण

यह मुजतबा खामेनेई का अपने पिता के अंतिम संस्कार की रस्मों के एक सप्ताह बाद पहला सार्वजनिक संदेश था। बयान में कहा गया, "हम शहीद नेता और इन दो युद्धों के सभी शहीदों के खून का बदला अपराधी और अपमानित हत्यारों से लेने का संकल्प लेते हैं।" उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह कार्रवाई केवल ईरान तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि "दुनिया भर के स्वतंत्र लोग" इसे अंजाम देंगे।

पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को एक अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे, जिसने क्षेत्र में चार महीने के युद्ध की शुरुआत की थी।

बाजार पर प्रभाव और भू-राजनीतिक चिंताएँ

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया हमलों के आदान-प्रदान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते पर संदेह पैदा कर दिया है। मध्य पूर्व में बढ़े हुए तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता का खतरा है, क्योंकि किसी भी बड़े संघर्ष से तेल की आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि संघर्ष विराम खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं। यह मिश्रित संकेत निवेशकों के लिए अनिश्चितता को और बढ़ाते हैं, जो इस क्षेत्र में स्थिरता के संकेतों की तलाश में हैं।

नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता

इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरान के नए नेतृत्व को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। बताया जाता है कि मुजतबा खामेनेई उसी हवाई हमले में घायल हुए थे और 8 मार्च को सर्वोच्च नेता नियुक्त होने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। उनकी अनुपस्थिति ने ईरान के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

उनके पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने 37 वर्षों तक शासन किया, को भारी भीड़ के बीच देश के सबसे पवित्र स्थल में दफनाया गया। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि नया नेतृत्व देश को किस दिशा में ले जाता है और उनकी बदला लेने की धमकी का वैश्विक राजनीति और बाजारों पर क्या असर होता है।

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