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ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने पिता की हत्या का बदला लेने की कसम खाई, तनाव बढ़ा

ईरान के नए सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्ववर्ती अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है। शनिवार को जारी एक बयान में, उन्होंने कहा कि यह बदला "निश्चित रूप से" लिया जाएगा, जिससे मध्य पूर्व में पहले से ही मौजूद तनाव और बढ़ गया है।
सर्वोच्च नेता का पहला बयान
यह बयान सर्वोच्च नेता के रूप में 8 मार्च को उनकी नियुक्ति के बाद उनका पहला सार्वजनिक संदेश है, जिसे सरकारी टेलीविजन पर पढ़कर सुनाया गया। रॉयटर्स के अनुसार, बयान में कहा गया है, "शहीद नेता और इन दो युद्धों के सभी शहीदों के खून का बदला अपराधी और अपमानित हत्यारों से लेने का हम संकल्प लेते हैं।"
बयान में यह भी कहा गया कि बदला लेना "राष्ट्र की मांग" है। खामेनेई ने आगे कहा, "चाहे हम वहां हों या न हों, यह पूरा होगा, और जल्द ही दुनिया भर में हर स्वतंत्र व्यक्ति इस दिव्य मिशन का एक हिस्सा पूरा करेगा।"
पृष्ठभूमि और बढ़ती अनिश्चितता
अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने 37 वर्षों तक ईरान पर शासन किया, 28 फरवरी को एक कथित अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। हमले के बाद से, उनके बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। वरिष्ठ सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्टों में कहा गया है कि हमले में उन्हें चोटें आई थीं, जिससे ईरान के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है।
Adउनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति ने ईरान के भीतर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। मोजतबा खामेनेई को शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के समर्थन से सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था।
भू-राजनीतिक जोखिम और बाज़ार पर प्रभाव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच चार महीने के युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से एक नाजुक युद्धविराम समझौते पर संदेह बढ़ रहा है। इस सप्ताह दोनों देशों की सेनाओं के बीच हमलों के आदान-प्रदान ने स्थिति को और जटिल कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि युद्धविराम समाप्त हो गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं। खामेनेई की बदला लेने की प्रतिज्ञा मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक जोखिम को बढ़ाती है, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाज़ारों पर पड़ सकता है। निवेशक इस क्षेत्र में अस्थिरता के संकेतों पर कड़ी नजर रख रहे हैं, जिससे तेल की कीमतों और अन्य परिसंपत्तियों में उतार-चढ़ाव हो सकता है।