Story
आईईए का अनुमान: कोविड के बाद पहली बार वैश्विक तेल मांग में आएगी गिरावट

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक तेल मांग 2020 के बाद पहली बार गिरावट की ओर अग्रसर है। एजेंसी ने अपनी नवीनतम मासिक तेल बाजार रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण मध्य पूर्व में उत्पादन और निर्यात बाधित होने से इस साल मांग में पिछले साल की तुलना में 10 लाख बैरल प्रति दिन की कमी आएगी।
मध्य पूर्व संकट का प्रभाव
IEA के अनुसार, यह संकुचन मुख्य रूप से फारस की खाड़ी के माध्यम से निर्यात को बाधित करने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण हुआ है। एजेंसी ने कहा कि रिकवरी चल रही है, लेकिन चेतावनी दी कि नए सिरे से लड़ाई दृष्टिकोण को और धूमिल कर सकती है।
यह पूर्वानुमान इस धारणा पर आधारित है कि युद्धविराम बना रहेगा और जलडमरूमध्य धीरे-धीरे फिर से खुल जाएगा। IEA ने लिखा, "हालांकि वैश्विक तेल बाजार का संतुलन साल के अंत तक अधिशेष (surplus) की ओर बढ़ता दिख रहा है, लेकिन यह पूर्वानुमान इस धारणा पर टिका है कि जलडमरूमध्य के माध्यम से टैंकरों का प्रवाह धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा।"
एजेंसी ने यह भी कहा, "खाड़ी में इस हफ्ते आग के नए आदान-प्रदान से एक स्थायी शांति समझौते तक नहीं पहुंचने के जोखिम उजागर होते हैं, जो तेल बाजारों के सामान्यीकरण के लिए जरूरी है।"
रूस के उत्पादन पर भी असर
AdIEA ने यूक्रेन द्वारा रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ तेज ड्रोन अभियान का हवाला देते हुए रूसी तेल उत्पादन के लिए अपने दृष्टिकोण को भी कम कर दिया है। कीव ने हाल के महीनों में रूसी तेल रिफाइनरियों और संबंधित सुविधाओं पर हमले बढ़ा दिए हैं।
एजेंसी ने कहा, "हमले जारी रहने के कारण हमने इस साल और अगले साल के लिए अपने रूसी आपूर्ति दृष्टिकोण को क्रमशः 85,000 बैरल प्रति दिन और 1,50,000 बैरल प्रति दिन कम कर दिया है।" अब पूर्वानुमान अवधि में औसत उत्पादन 8.8 मिलियन (88 लाख) बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है।
बाजार का दृष्टिकोण
इस रिपोर्ट के बीच, शुक्रवार को तेल की कीमतों में बहुत कम बदलाव देखा गया, लेकिन वे साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रही थीं। निवेशक अमेरिकी-ईरान शत्रुता और इस उम्मीद के बीच संतुलन बना रहे हैं कि संघर्ष फारस की खाड़ी की कच्चे तेल की आपूर्ति को गंभीर रूप से बाधित किए बिना सीमित रहेगा। IEA का पूर्वानुमान निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो यह दर्शाता है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता ऊर्जा बाजारों को कितनी जल्दी प्रभावित कर सकती है।