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डॉलर और तेल में नरमी से सोना एक सप्ताह के निचले स्तर से 1% से अधिक सुधरा

Summary
डॉलर के कमजोर होने और तेल की कीमतों में गिरावट से मुद्रास्फीति की चिंताएं कम हुईं, जिससे गुरुवार को सोने की कीमतों में एक सप्ताह के निचले स्तर से 1% से अधिक की तेजी आई।
डॉलर में नरमी और तेल की कीमतों में गिरावट के बीच गुरुवार को सोने की कीमतों में 1% से अधिक का उछाल आया, जिससे यह पिछले सत्र के एक सप्ताह के निचले स्तर से उबर गया। मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कमी और भू-राजनीतिक तनाव के कुछ हद तक शांत होने से निवेशकों ने कीमती धातु में फिर से रुचि दिखाई।
बाजार का प्रदर्शन
गुरुवार को ट्रेडिंग के दौरान, हाजिर सोने की कीमत 1.2% बढ़कर $4,124.36 प्रति औंस हो गई। इसी तरह, सोना वायदा भी 1.2% की बढ़त के साथ $4,133.17 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
यह तेजी बुधवार की गिरावट के बाद आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने सुरक्षित-संपत्ति के रूप में डॉलर को बढ़ावा दिया था, जिससे सोने पर दबाव पड़ा था।
कीमतों में उछाल के प्रमुख कारण
सोने में इस सुधार के पीछे कई कारक थे। सबसे प्रमुख अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में थोड़ी कमी आना था, जिसके चलते तेल की कीमतों में नरमी आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान कि ईरान एक समझौता करना चाहता है, ने बाजार की धारणा को शांत किया।
Adतेल की कीमतों में गिरावट से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका कम हो गई है। यह फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में आक्रामक रूप से बढ़ोतरी करने का दबाव कम करता है, जो गैर-ब्याज वाली संपत्ति सोने के लिए एक सकारात्मक संकेत है। कमजोर डॉलर भी अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोने को सस्ता बनाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है।
फेडरल रिजर्व का रुख और Ausblick
निवेशक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर भी नजर बनाए हुए हैं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की हालिया बैठक के मिनट्स से पता चला है कि ब्याज दरों के भविष्य को लेकर नीति निर्माताओं के बीच मतभेद हैं।
- कुछ सदस्य तेल की कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति को लेकर चिंतित थे और दरों में बढ़ोतरी का समर्थन कर रहे थे।
- वहीं, अधिकांश सदस्यों का मानना था कि यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतें गिरती हैं, तो मुद्रास्फीति स्वाभाविक रूप से फेड के 2% लक्ष्य की ओर वापस आ सकती है।
न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स ने भी गुरुवार को कहा कि उन्हें साल के बाकी समय में ऊर्जा की कीमतों में लगातार वृद्धि की उम्मीद नहीं है। यह दृष्टिकोण बताता है कि केंद्रीय बैंक दरों में बढ़ोतरी को लेकर सतर्क रुख अपना सकता है, जो सोने की कीमतों को समर्थन दे सकता है।