Story

फ्रांस में सॉफ्ट गेहूं की पैदावार औसत से 3% कम रहने का अनुमान: Arvalis

ENTHMSVIIDZHZH-TWJAKOHI
Jul 30, 20261 min read
फ्रांस में सॉफ्ट गेहूं की पैदावार औसत से 3% कम रहने का अनुमान: Arvalis

Summary

फ्रांसीसी फसल संस्थान Arvalis ने अनुमान लगाया है कि देश में सॉफ्ट गेहूं की पैदावार 7.0 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर होगी, जो पांच साल के औसत से 3% कम है। यह यूरोपीय संघ के सबसे बड़े अनाज उत्पादक के लिए एक और चुनौतीपूर्ण सीजन का संकेत है।

Text size
Background

फ्रांसीसी फसल संस्थान Arvalis के अनुसार, देश में सॉफ्ट गेहूं की पैदावार 7.0 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पांच साल के औसत से 3% कम है। यह पूर्वानुमान यूरोपीय संघ के सबसे बड़े अनाज उत्पादक फ्रांस के किसानों के लिए एक और चुनौतीपूर्ण सीजन का संकेत देता है।

विस्तृत पूर्वानुमान

Arvalis का यह अनुमान कृषि मंत्रालय के जुलाई के मध्य के 6.93 टन प्रति हेक्टेयर के अनुमान से थोड़ा अधिक है। मंत्रालय ने इस साल की कुल फसल 32.0 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया था।

गेहूं उत्पादक समूह AGPB के अनुसार, अन्य प्रमुख फसलों की पैदावार भी प्रभावित हुई है:

  • ड्यूरम गेहूं: पैदावार 5.1 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो औसत स्तर से 4% कम है।
  • शीतकालीन जौ: पैदावार 6.3 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर के साथ औसत स्तर के करीब रहने का अनुमान है।
  • वसंत जौ: पैदावार 5.3 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही, जो सामान्य उत्पादन से कम है।

कम पैदावार के कारण

Sample IUX Markets – In-articleAd

AGPB ने उल्लेख किया कि पैदावार विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग खेतों में बहुत भिन्न रही है। समूह ने इस भिन्नता के लिए प्रतिकूल मौसम की स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है।

पैदावार में कमी के मुख्य कारणों में सर्दियों में अत्यधिक बारिश, कुछ क्षेत्रों में अपर्याप्त धूप, गर्मी की लहरें (लू) और सीजन के अंत में पानी की कमी शामिल हैं। इन कारकों ने फसल के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।

बाजार के लिए निहितार्थ

फ्रांस यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा अनाज उत्पादक है, और इसकी गेहूं की फसल का आकार यूरोपीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। औसत से कम पैदावार का यह पूर्वानुमान वैश्विक अनाज बाजारों में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ा सकता है, खासकर जब दुनिया के अन्य हिस्सों में भी मौसम संबंधी चुनौतियां देखी जा रही हैं।

Back to latest news

LATEST